27 सितंबर 2019 - 14:35
कर्बला की 8 घंटे की जंग को आदर्श बनाकर ईरान ने 8 साल तक जंग लड़ी और जीत हासिल की, हाज अली अकबरी

ईरान के एक वरिष्ठ धर्मगुरु हुज्जतुल इस्लाम मोहम्मद जवाद हाज अली अकबरी ने कहा है कि ईरान की इस्लामी क्रांति आशूर के दिन इमाम हुसैन (अ) की पुकार का जवाब या इमाम हुसैन की आवाज़ पर लब्बैक थी।

उन्होंने कहा, कर्बला में आशूर के दिन समस्त ईश्वरीय दूतों की आवाज़ इमाम हुसैन की आवाज़ में शामिल हो गई थी, जब उन्होंने पुकारा था, "क्या है कोई मदद करने वाला जो मेरी मदद करे", लेकिन उस समय किसी ने भी इस पुकार का जवाब नहीं दिया था, हालांकि सब जानते थे कि एक समय आएगा जब इस ईश्वरीय पुकार पर लोग लब्बैक कहेंगे।

उन्होंने कहा, यह लोग इमाम हुसैन के इश्क़ व मोहब्बत में डूबे होंगे और साम्राज्यवादियों की आलोचनाओं की परवाह नहीं करेंगे। ईश्वर ऐसे ही लोगों को चुनता है, यह वही लोग हैं जो इतिहास को हमेशा के लिए बदल कर रख देते हैं।

हाज अली अकबरी का कहना था कि ईरानी जनता इमाम हुसैन का नाम लेकर सड़कों पर उतरी और क्रांति को सफल बनाने के बाद उसने जनमत संग्रह में इस्लामी गणतंत्र का चयन किया, जिसने आगे चलकर साम्राज्यवाद के सभी समीकरणों को उलट पलट कर रख दिया। आज इस्लाम के दुश्मन सबसे अधिक इसी इस्लामी गणतंत्र से ख़तरा महसूस कर रहे हैं और डरे हुए हैं।

एक मजलिस को संबोधित करते हुए तेहरान के इमामे जुमा हाज अकबरी ने कहा, ईरान के दुश्मनों ने एकजुट होकर ईरान पर हमला कर दिया था और आठ दिन में इस्लामी गणतंत्र को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर देने का एलान किया था, लेकिन यह जंग 8 वर्षों तक चली और दुश्मनों को अपमानजनक पराजय झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा, यह 8 वर्ष कर्बला की आठ घंटों की लड़ाई को समर्पित थे। हमने इमाम हुसैन की आठ घंटे की जंग से इतना कुछ सीखा कि 8 वर्ष तक पूरी बातिल दुनिया का मुक़ाबला किया और उसे पराजित किया।