आग पर नियंत्रण तो होना ही था लेकिन बहुत बड़े सवाल जो पैदा हुए हैं और बहुत दिनों तक सऊदी अरब के सुरक्षा विभाग को जो चिंता में डालने वाले हैं उनका सबंध इस बात से है कि यह ड्रोन विमान किस तरह सफलता के साथ अपने लक्ष्यों तक पहुंचे और पूरी सफ़ाई से उन्होंने अपने लक्ष्यों को निशाना बनाया वह भी एसे इलाक़े में जिसके बारे में यह बात सब जानते हैं कि वहां सुरक्षा के पुख़्ता इंतेज़ाम किए जाते हैं। इसलिए कि यह वह प्रतिष्ठान हैं जो सऊदी अरब की आमदनी के मुख्य स्रोतों में गिने जाते हैं। क्या सऊदी अरब के भीतर से इस हमले में सहयोग किया गया है?
इन सवालों का जवाब तलाश करने से पहले दोनों आयल फ़ील्ड्स और उनसे संबंधित बड़ी तेल रिफ़ाइनरी के बारे में बताना ज़रूरी है।
बक़ैक़ आयल फ़ील्ड सऊदी अरब ही नहीं दुनिया की बहुत पुरानी आयल फ़ील्ड है इसका पता वर्ष 1940 में लगाया गया था। इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। इससे लगी हुई ख़रैस आयल फ़ील्ड है दो रिफ़ाइनरियां हैं। बताया जाता है कि सऊदी अरब की आरामको कंपनी का लगभग 70 प्रतिशत उत्पादन इन तेल रिफ़ाइनरियों के माध्यम से तैयार होता है।
यह बात भी ध्यान में रखने वाली है कि एक साल से कम अवधि में आरामको कंपनी से संबंधित प्रतिष्ठानों पर यह तीसरा हमला है। पहला हमला मई महीने में हुआ जब सात ड्रोन विमानों ने पूरब पश्चिम तेल पाइपलाइन के पंपिंग प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। दूसरा हमला 17 अगस्त को शैबा आयल फ़ील्ड पर हुआ था जो रोज़ाना लगभग पांच लाख बैरल तेल पैदा करता है। तीसरा हमला शनिवार की सुबह हुआ जो अब तक का सबसे बड़ा हमला था।
यमन की सेना के प्रवक्ता यहया अस्सरीअ ने हमले के बारे में जो बयान दिया उस पर ध्यान देने से कई बिंदु सामने आते हैं।
पहली चीज़ उन्होंने यह कही कि हमला बहुत सटीक इंटैलीजेन्स जानकारियां एकत्रित करने के बाद किया गया। सवाल यह है कि इंटैलीजेन्स जानकारियां एकत्रित करने में किसने मदद की। क्या यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने सऊदी इंटैलीजेन्स के भीतर सेंध लगा ली है?
दूसरी बात यह है कि बक़ैक़ और हरैस आयल फ़ील्ड यमन की राजधानी सनआ से लगभग 1300 किलोमीटर दूर हैं तो इन ड्रोन विमानों ने इतनी लंबी दूरी कैसे पूरी की और उनका सुराग़ नहीं लगाया जा सका, कैसे ड्रोन विमानों को इतनी लंबी दूरी तय करने का ईंधन मिला? क्या यह विमान सअदा से ही उड़े थे।
तीसरी बात यह है कि यहया अस्सरीअ ने सऊदी अरब के भीतर मौजूद कुछ भले लोगों के सहयोग की बात कही है तो क्या सऊदी अरब के भीतर कुछ गुट मौजूद हैं जो यमन की सेना की मदद कर रहे हैं?
चौथी बात यह है कि हो सकता है यह विमान सऊदी अरब के भीतर से या बहरैन या फिर इराक़ से उड़ाए गए हों और यह भी हो सकता है कि इन्हें किसी समुद्री जहाज़ द्वारा फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े में पहुंचाया गया हो और सऊदी तट के क़रीब पहुंचने के बाद वहां से इन ड्रोन विमानों ने उड़ान भरी हो।
पांचवीं बात यह है कि यहया अस्सरीअ ने कहा कि सऊदी अरब के भीतर हमारे लक्ष्यों की सूची लगातार बढ़ती जा रही है। इसका मतलब यह है कि अभी और हमले होने वाले हैं।
यमन का अंसारुल्लाह आंदोलन उस प्रतिरोधक मोर्चे का हिस्सा है जिसका नेतृत्व ईरान कर रहा है और उनमें आपस में भरपूर समन्वय पाया जाता है।
दो बयान बेहद महत्वपूर्ण हैं जो ज़मीनी हालात को समझने में मदद कर सकते हैं।
एक बयान हिज़्बुल्लाह लेबनान के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने दिया। उन्होंने हमारे मौला हुसैन के शहादत दिवस के कार्यक्रम में कहा कि अमरीका ने हिज़्बुल्लाह पर जो प्रतिबंध लगाए हैं उन प्रतिबंधों के बारे में भी और उन प्रतिबंधों के लिए अनुकूल हालात बनाने वाले तत्वों के बारे में भी हमारे पास नए विकल्प मौजूद हैं।
दूसरा बयान ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई के वरिष्ठ सलाहकार डाक्टर अली अबकर विलायती ने दिया। उन्होंने कहा कि यदि ईरान को फ़ार्स खाड़ी से अपना तेल निर्यात करने से रोक दिया जाएगा मध्यपूर्व में कोई भी देश अपना तेल नहीं निर्यात कर सकेगा।
यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने नया समीकरण स्थापित कर दिया है कि वह जब चाहें सऊदी अरब के भीतर कहीं भी कितना भी बड़ा हमला कर सकते हैं।
आख़िर में हम यह कहना चाहेंगे कि आरामको कंपनी के शेयर अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में नीलाम करने की बात हो रही है तो इन हमलों के बाद यह शेयर कौन ख़रीदेगा? अगर कोई ख़रीदेगा तो किस क़ीमत पर ख़रीदेगा? नीलामी के समय किए जाने वाले यह हमले क्या ख़ास संदेश नहीं दे रहे हैं?