19 अगस्त 2019 - 13:14
तेल टैंकरों के युद्ध में ईरान विजयी, अमरीका के मुंह पर ब्रिटेन का थप्पड़ः रायुल यौम

मशहूर अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने अपने संपादकीय में जिब्रालटर में ईरान के तेल टैंकर को रोके जाने के बाद उसे मुक्त किए जाने को अमरीका के मुंह पर ब्रिटेन का थप्पड़ बताया है।

रायुल यौम के प्रधान संपादक अब्दुल बारी अतवान ने लिखा है कि ईरानी तेल टैंकर "ग्रेस-1" को उसे लदी खेप के साथ ज़ब्त करने की अमरीका की याचिका का जिब्रालटर के अधिकारियों द्वारा विरोध, अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के मुंह पर ज़ोरदार थप्पड़ था जिन्होंने यह आग्रह किया था। यह विषय, यूरोपीय देशों और संसार में अमरीका का रौब ख़त्म होने को दर्शाता है। अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा और इस संकट का अगला अध्याय क्या होगा?

 

सबसे पहले तो यह ज़रूरी है कि स्पष्ट और पारदर्शी रूप से यह बताया जाए कि अमरीका की याचिका के विरोध का फ़ैसला पहले चरण में ब्रिटेन का निर्णय है और अगर बोरिस जाॅन्सन की कंज़रवेटिव सरकार, जिसने छः हफ़्ते पहले अमरीका की बात मान कर ईरानी तेल टैंकर को रोक कर बड़ी ग़लती की थी, अगर इस तेल टैंकर को न छोड़ना चाहती तो वह ऐसा कर सकती थी लेकिन इस बार उसने ईरान और क्षेत्र में उसके घटकों से हर प्रकार के सैन्य टकराव से बचने के लिए अमरीका की बात नहीं मानी और जिब्रालटर की अदालत के पीछे छिप गया। ब्रिटेन का यह रवैया पूरी तरह से युक्तिपूर्ण था।

 

अमरीका की समुद्री डकैती पर ईरान कभी चुप नहीं रहेगा

हमें नहीं पता कि अमरीका का अगला भड़काऊ क़दम क्या होगा लेकिन "आदरियाने दरिया" के नए नाम से आगे बढ़ने वाले ईरान के तेल टैंकर पर हमले के लिए अमरीकी बेड़ों को दिया जाने वाला आदेश, ईरान की विजय पर पर्दा डालने की अमरीका की एक कोशिश है और संभव है कि इससे तेल टैंकरों के युद्ध के शोले भड़क उठें क्योंकि ईरान के नौसेना प्रमुख ने कहा है कि इस तेल टैंकर की रक्षा के लिए वे समुद्री बेड़ा भेजने को तैयार हैं। इससे पता चलता है कि ईरान, अमरीका की समुद्री डकैती पर बिलकुल भी चुप नहीं रहेगा और अमरीका को कड़ा जवाब देगा। इस संबंध में पिछले कुछ महीनों की घटनाएं अभी भी लोगों को याद हैं।

 

फ़ार्स की खाड़ी में अमरीका की मूर्खतापूर्ण नीतियां ब्रिटेन को भी प्रभावित करेगी

जिब्रालटर में वास्तविक सत्ता ब्रिटेन की ही है और इस दृष्टि से उसने ट्रम्प और जाॅन बोलटन को दो ज़ोरदार थप्पड़ रसीद किए हैं। पहला थप्पड़ तो उसने ईरानी तेल टैंकर को छोड़ कर लगाया और दूसरा थप्पड़, इस तेल टैंकर को ज़ब्त करने की अमरीका की मांग को रद्द करके लगाया। इसका अर्थ यह है कि फ़ार्स की खाड़ी में समुद्री यातायात को सुरक्षित बनाने के नाम पर अमरीका जिस समुद्री गठबंधन को बनाने की कोशिश कर रहा है उसमें ब्रिटेन की भागीदारी की संभावना अगर पूरी तरह से ख़त्म नहीं हुई है तो कमज़ोर ज़रूर पड़ी है क्योंकि अमरीका की यह मूर्खतापूर्ण नीति, ब्रिटेन को भी ख़तरे में डाल देगी।

 

ईरान कभी घुटने नहीं टेकेगा और कभी सफ़ेद झंडा नहीं उठाएगा

हम इससे पहले भी कह चुके हैं और फिर कहते हैं कि ईरान किसी भी स्थिति में घुटने नहीं टेकेगा और कभी भी शांति का सफ़ेद झंडा नहीं उठाएगा बल्कि वह हमेशा अपनी पूरी शक्ति के साथ अमरीका व इस्राईल की ग़ुंडागर्दी के सामने डटा रहेगा। इस बात को वह अपनी वायु सीमा का उल्लंघन करने वाले अमरीका के विकसित ड्रोन को मार कर सिद्ध कर चुका है। इसी तरह उसने क़ानून का उल्लंघन करने वाले ब्रिटिश तेल टैंकर को सबकी नज़रों के सामने बंदर अब्बास पहुंचा दिया ताकि जिब्रालटर में अपने तेल टैंकर को रोके जाने का जवाब दे सके। हमें लगता है कि अगर अमरीका के समुद्री बेड़ों ने ईरान के मुक्त होने वाले तेल टैंकर को रतकने की कोशिश की तो ईरान भी हुर्मुज़ स्ट्रेट या ओमान सागर में अमरीका के किसी तेल टैंकर या युद्धक जहाज़ को रोक देगा।

 

अमरीकी सरकार मध्यपूर्व में अकेली और अलग-थलग पड़ चुकी है

यह पहली बार है जब अमरीका की सरकार मध्यपूर्व में अकेली और अलग-थलग दिखाई दे रही है और वह एक मज़बूत गठजोड़ नहीं बना पा रही है जो ईरान के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंधों का समर्थन करे। यह बात स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि प्रतिबंधों की मूर्खतापूर्ण नीतियां, जिन्हें ट्रम्प सरकार घायल शेर की तरह हमेशा इस्तेमाल करती है, अब लाभदायक नहीं रह गई हैं। दूसरी ओर प्रतिरोध के मोर्चे के सर्वेसर्वा के रूप में ईरान, मध्यपूर्व के क्षेत्र में सबसे मज़बूत है और उसके पास अभूतपूर्व सैन्य प्रतिरोधक क्षमता है। प्रतिरोध के मोर्चे में सीरिया व इराक़ जैसे देश और हिज़्बुल्लाह, अंसारुल्लाह, हमास, जेहादे इस्लामी और इसी तरह के अन्य संगठन शामिल हैं।

 

हम ट्रम्प को नसीहत करते हैं कि वे अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करें और तनाव फैलाने से बाज़ आ जाएं। उन्होंने अपने चुनावी प्रचार में वादा किया था कि वे मध्यपूर्व से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकाल लेंगे और इस क्षेत्र में कोई युद्ध शुरू नहीं करेंगे। हम उन्हें यह भी नसीहत करते हैं कि वे अपने देश की इज़्ज़त और उसका रौब बाक़ी रखने के लिए और हर प्रकार की पराजय से बचने के लिए अपने देश के रणनैतिक हितों पर इस्राईल के हितों को प्राथमिकता न दें विशेष कर इस लिए भी कि अमरीका में जल्द ही राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और वे दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव जीतने के इच्छुक हैं। अलबत्ता हम यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि वे हमारी इन नसीहतों पर अमल नहीं करेंगे क्योंकि उनके दोस्त बेनयामिन नेतनयाहू और वाॅशिंग्टन में इस्राईली लाॅबी, हर उस बात को उनसे छिपाती है जो अमरीका के हित में होती है।

 

अंत में हम यह कहना चाहेंगे कि तेल टैंकरों के युद्ध के पहले चरण में ईरानी विजयी हुआ है और वह अपनी इस विजय को इसी तरह बचाए रखेगा। वह समुद्री टकराव के लिए हर प्रकार के व्यवहारिक क़दमों के लिए तैयार है और चाहे जितनी भी क़ीमत अदा करनी पड़े वह इस युद्ध को अंत तक ले जाएगा। हां अगर दूसरा पक्ष हार मान ले, ईरान की शर्तों के सामने झुक जाए, तनाव भड़काना छोड़ दे और तर्कसंगत व्यवहार करे तो बात अलग है। (HN)

साभारः रायुल यौम (मशहूर अरबी समाचारपत्र)