12 अगस्त 2019 - 13:34
मैं बालाबक शहर में उस समय पहुंचा जब सैयद हसन नसरुल्लाह इस शहर की यात्रा कर रहे थे, लेबनान में इस्राईल से युद्ध को लेकर आम चर्चा

लेबनान में हिज़्बुल्लाह संगठन के घटक अलवफ़ा वल मुक़ावमा एलायंस के अध्यक्ष मुहम्मद राद का बयान मेरे लिए अनपेक्षित नहीं है जिसमें उन्होंने कहा कि इस्राईल लेबनान के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने की तैयारी कर रहा है और इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन इस्राईल से रूबरू होने और देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस समय लेबनान की यात्रा करने वाले हर व्यक्ति को बहुत आसानी से यह बात समझ में आ जाएगी कि संभावित युद्ध की तैयारी चल रही है।

हिज़्बुल्लाह का नेतृत्व अब तक युद्ध की कोई भी बात बरने से बच रहा था क्योंकि लेबनान में सैलानियों के आने का समय था अतः हिज़्बुल्लाह के नेता युद्ध की संभावनाओं के बारे में कोई बयान देकर मौसम ख़राब नहीं करना चाहते थे। यह मौसम अब गुज़र चुका है और सैलानियों के आने की अब उम्मीद नहीं रही है। जबकि फ़ार्स खाड़ी में तेल टैंकरों की लड़ाई चल रही है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने हुरमुज़ स्ट्रेट से जलयानों की आवाजाही की सुरक्षा के नाम पर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन बनाने की योजना शुरू की है। इन हालात में हिज़्बुल्लाह के नेताओं ने भी खुलकर बयान देना शुरू कर दिया है और साफ़ साफ़ कहने लगे हैं कि यदि लेबनान पर इस्राईल कोई हमला करता है तो इस्राईल के भीतर किन लक्ष्यों को ध्वस्त किया जाएगा।

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस पूरे इलाक़े में इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे से जुड़े आंदोलनों के बीच बड़ा मज़बूत समन्वय है। लेबनान में हिज़्बुल्लाह, फ़िलिस्तीन में हमास और जेहादे इस्लामी, इराक़ में हश्दुश्शाबी तथा यमन में अंसारुल्लाह के बीच यह समझौता साफ़ महसूस किया जा सकता है कि यदि कोई भी युद्ध अमरीका या इस्राईल ने शुरू किया तो यह सारे संगठन एक साथ हरकत में आ जाएंगे।

लेबनान में आम जनता के स्तर पर भी और राजनैतिक मंचों पर भी विशेष प्रकार का आत्म विश्वास दिखाई देता है। इसका अंदाज़ा हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह की पिछले हफ़्ते की बालाबक शहर की यात्रा से लगाया जा सकता है। वह वरिष्ठ नेता मुहम्मद यज़बक से मिलने के लिए इस शहर में पहुंचे। यज़बक बीमार चल रहे थे।

संदेश साफ़ है कि सैयद हसन नसरुल्लाह लेबनान के हर इलाक़े की यात्रा कर रहे हैं और बार बार सीरिया के दौरे ही करते हैं जहां राष्ट्रपति बश्शार असद तथा अन्य सीरियाई व ईरानी अधिकारियों से उनकी मुलाक़ातें होती हैं। वह लेबनान में फ़िलिस्तीनी संगठनों के नेताओं से भी मिलते हैं।

मैंने बालाबक शहर में किसी तरह की कोई आपात स्थिति नहीं देखी हालांकि मैं उस समय बालाबक में था जब सैयद हसन नसरुल्लाह इस शहर की यात्रा पर पहुंचे थे।

लेबनान में आम जनता के स्तर पर और विशेष रूप से हिज़्बुल्लाह के इलाक़ों में आजकल सैयद हसन नसरुल्लाह के उस बयान की चर्चा है जिसमें उन्होंने कहा था कि वह बहुत जल्द मस्जिदुल अक़सा में नमाज़ पढ़ेंगे। लोगों में यह विश्वास है सैयद हसन नसरुल्लाह का यह वादा पूरा ज़रूर होगा तथा पाषाण युग में जो पहुंचेगा वह लेबनान नहीं बल्कि इस्राईल है। इसलिए कि इस्राईल की मिसाइल ढाल व्यवस्था आयरन डोम लेबनान तथा ग़ज़्ज़ा पट्टी से आने वाले मिसाइलों को रोकने में नामाक हो चुकी है। वैसे अब यह मिसाइल एक साथ लेबनान, ग़ज़्ज़ा पट्टी, इराक़, सीरिया, यमन और ईरान से बरसेंगे क्योंकि फ़ार्स खाड़ी में अमरीकी गठबंधन में शामिल होने का इस्राईल का फ़ैसला इस बात के लिए पर्याप्त है कि इस्राईल को हमले का अच्छा टारगेट माना जाए।

श्री राद ने जो कहा वह लेबनान की आम जनता की सोच हे। उन्होंने कहा कि हम अपने दुशमन को अच्छा सबक़ सिखाएंगे।

आज इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन किसी एक इलाक़े में सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे अरब व इस्लामी जगत में फैल चुका है जिसे इस्लामी जनता का भरपूर समर्थन हासिल है।

अगर आपको इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन की झलक देखनी है तो इन दिनों लेबनान का दौरा कर लीजिए आपके अंदर विचित्र जोश भर जाएगा, मुझे जब भी निराशा और अरब सरकारों की नीतियों पर गहरा आक्रोश होता है तो लेबनान चला जाता हूं और ख़ुश होकर लौटता हूं।