6 अगस्त 2019 - 13:52
क्या इमारात, सऊदी गठजोड़ से निकलने की तैयारी कर रहा है? यमन में अंसारुल्लाह की विजय के छः कारण क्या हैं? क्या इस्राईल पर हमला अग

जब अबू धाबी के युवराज मुहम्मद बिन ज़ायद के पूर्व सलाहकार अब्दुल्लाह अब्दुल ख़ालिक़ कहते हैं कि इमारात के लिए यमन में युद्ध समाप्त हो चुका है और केवल उसकी औपचारिक घोषणा बाक़ी है तो इसका अर्थ यह है कि यमन से इमारात के सैनिकों का निष्कासन रणनैतिक क़दम था।

अरबी भाषा के समाचारपत्र रायुल यौम के प्रधान संपादक अब्दुल बारी अतवान ने अपने संपादकीय में लिखा है कि जब अंसारुल्लाह के नेता अब्दुल मलिक अलहूसी ने अपने भाषण में यह कहा कि दुश्मन दिन प्रति दिन बिखरता जा रहा है तो उन्होंने कोई ग़लत बात नहीं कही। वे कहते हैं कि अब्दुल्लाह अब्दुल ख़ालिक़ ने अपने ट्वीट में जिस बात का उल्लेख नहीं किया है वह यह है कि सऊदी अरब के नेतृत्व वाला अरब गठजोड़ भी इमारात के लिए समाप्त हो चुका है। रायुल यौम के संपादक ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि पिछले महीने इमारात के विदेश मंत्री शैख़ अब्दुल्लाह बिन ज़ायद की माॅस्को यात्रा के समय ही यह बात स्पष्ट हो गई थी कि यह देश यमन संकट से निकलने का मार्ग खोज रहा है, लिखा है कि इमारात को अंसारुल्लाह और ईरान के नेताओं से वार्ता का द्वार खोलने के लिए रूस से अच्छा मार्ग नहीं मिला। संपादक ने लिखा है कि ईरान व इमारात की सीमाओं की रक्षा के लिए समझौते पर हस्ताक्षर के लिए जो दल ईरान गया था वह वास्तव में कोई तकनीकी व सुरक्षा दल नहीं था बल्कि पहले चरण में राजनैतिक दल और दूसरे चरण में सैन्य दल था जो दोनों देशों के संबंधों में खड़े होने वाले बांध को गिराने और अगले चरण में उच्च स्तरीय मुलाक़ातों का मार्ग समतल करने के लिए गया था।

 

सऊदी अरब, आक्रामक मुद्र से रक्षात्मक मुद्रा में आया

रायुल यौम के संपादक ने इस बात की तरफ़ इशारा करते हुए कि यमन में युद्ध अपनी किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका और बड़ी तेज़ी से अंत की ओर अग्रसर है और इस युद्ध के सऊदी अरब के लिए प्रतिकूल परिणाम सामने आए हैं, लिखा है कि अंसारुल्लाह संगठन इस युद्ध में विजेता के रूप में उभरा है और अपनी बातें मनवाता जा रहा है जबकि सऊदी अरब आक्रामक मुद्रा से रक्षात्मक मुद्रा में आ गया है। इस युद्ध में उसके सामने अत्यंत बुरे परिणाम सामने आए हैं, पूरी दुनिया में उसकी छवि बिगड़ गई है और उस पर युद्ध अपराध के आरोप लग रहे हैं। अलबत्ता अंसारुल्लाह की बढ़ती शक्ति को देखते हुए यह भी नहीं कहा जा सकता कि वह रक्षात्मक मुद्रा में भी कोई कामयाबी हासिल कर पाएगा।

 

इमारात व सऊदी अरब का गठजोड़ अत्यंत कमज़ोर पड़ चुका है

अतवान का कहना है कि अब जब यमनी बलों के मीज़ाइल सऊदी अरब की राष्ट्रीय तेल कंपनी के मुख्यालय और उसके तेल उद्योग के मुख्य केंद्र दम्माम शहर तक पहुंच गए हैं तो इसका यही अर्थ है कि यह उद्योग, जो सऊदी अर्थव्यवस्था का आधार है, असुरक्षित हो गया है और सऊदी अरब का 70 लाख बैरल तेल (उसके प्रतिदिन तेल निर्यात की मात्रा) ख़तरे में पड़ गया है। संयुक्त अरब इमारात के अधिकारी भी इन तथ्यों बल्कि इससे भी अधिक ख़तरनाक मामलों से अवगत हैं। इस आधार पर उन्होंने फ़ैसला किया है कि यमन युद्ध और सऊदी गठजोड़ से बाहर निकल जाएं, चाहे उन्होंने पहले विषय को स्पष्ट रूप से बयान कर दिया हो और दूसरे को छिपा लिया हो। इस आधार पर यह गठजोड़ एक बारीक बाल से बंधा हुआ है जो किसी भी आकस्मिक घटना या क्रोध से कभी भी टूट सकता है।

 

यमन में अंसारुल्लाह की विजय के 6 कारण

रायुल यौम के प्रधान संपादक ने लिखा है कि कुछ कारण है जिनके चलते अंसारुल्लाह संगठन बहुत अधिक शक्तिशाली है। ये कारण, जो अंसारुल्लाह के आंतरिक व बाहरी दुश्मनों और अतिक्रमणकारी देशों के दिमाग़ में नहीं आ सकते, इस प्रकार हैंः

  1. अंसारुल्लाह संगठन बिना किसी असमंजस के फ़ैसला करने की क्षमता रखता है।
  2. वह अपने देश, अपनी धरती, अपनी प्रतिष्ठा और अपने स्वाभिमान की रक्षा कर रहा है।
  3. उसे अरब और तेल संपन्न देशों का समर्थन हासिल नहीं है और अगर उसे इनका समर्थन हासिल होता तो उसकी पराजय निश्चित थी।
  4. वह फ़िलिस्तीन व प्रतिरोध के मोर्चे के साथ अमरीका व इस्राईल के मुक़ाबले में ऐसे समय में खड़ा है जब बहुत से अरब देश, ज़ायोनी दुश्मन से संबंध सामान्य कर रहे हैं।
  5. यमन संकट का बड़ी चतुराई से संचालन, संयम की नीति का पालन और उन 400 लक्ष्यों का बड़ी सटीकता से चयन जिनमें से अभी केवल 10 को निशाना बनाया गया है।
  6. झूठ न बोलना और छद्म युद्ध से दूरी।

क्या इस्राईल पर हमला अगला आश्चर्य होगा?

रायुल यौम समाचार पत्र के प्रधान संपादक अब्दुल बारी अतवान ने अपने संपादकीय के अंत में लिखा है कि हम अपनी बात को एक भविष्यवाणी से समाप्त करते हैं जो शायद कुछ लोगों के लिए बहुत आश्चर्यजनक हो और पसंद भी न आए। वह भविष्यवाणी यह है कि यमनी बलों के मीज़ाइलों का अगला निशाना अतिग्रहित फ़िलिस्तीन की ईलात या उम्मुर्रशाश बंदरगाह हो सकती है क्योंकि जब किसी के पास ऐसे मीज़ाइल हों रियाज़ और दम्माम में अपने लक्ष्यों को सटीक ढंग से भेद सकते हों, वह इस्राईल की इन बंदरगाहों पर बमबारी और ज़ायोनी काॅलोनियों में रहने वालों को आतंकित करने में तनिक भी नहीं हिचकिचाएगा। शायद कुछ लोग कहें कि इस्राईली सेना सनआ, सादा और अन्य शहरों पर बमबारी करके जवाब देगी तो इसके जवाब में हम कहेंगे कि इस्राईल के लिए इस बमबारी के परिणाम प्रतिकूल होंगे और उसे कोई नया नतीजा नहीं मिलेगा क्योंकि पिछले पांच साल में सऊदी अरब और इमारात के युद्धक विमान यही करते रहे हैं और उन्होंने बमबारी के लिए कोई नया लक्ष्या बाक़ी ही नहीं छोड़ा है लेकिन इसके बावजूद वे यमनियों को झुकाने में विफल रहे हैं।

यमनी बलों के हाथों अतिग्रहित फ़िलिस्तीन के अंदर तक बमबारी और इस्राईल द्वारा उसका जवाब, हूसियों को ऐसे नायकों में बदल देगा जो दसियों करोड़ अरब व मुसलमानों वाली क्षेत्र की एक नई शक्ति का नेतृत्व करेंगे। अब यह भविष्यवाणी कब पूरी होगी? इस सवाल के जवाब के लिए अगले हफ़्तों और महीनों की प्रतीक्षा करनी होगी।