आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने कुछ महीने पहले, नवविवाहित जोड़ों के एक समूह को संबोधित करते हुए यह बात कही थी जो हज़रत अली अलैहिस्सलाम और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के विवाह की वर्षगांठ पर प्रकाशित हुआ।
उन्होंने अच्छे जीवन साथी को ईश्वर की बड़ी नेमतों में बताते हुए नव विवाहित जोड़ों से इस्लामी नियमानुसार जीवन बिताने की अनुशंसा की। उसके बाद उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम के उस कथन का हवाला दिया जिसमें उन्होंने मुसलमानों से विवाह करने, नस्ल व आबादी बढ़ाने की ताकीद की है।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहाः मुसलमानों की तादाद चाहे वह ईरान जैसा मुसलमान देश हो या इस्लामी जगत जैसे इस्लामी वातावरण हो, ज़्यादा हो जाए तो इससे विकास और उत्कृष्टता का मार्ग समतल होगा।
उन्होंने अपनी बात के तर्क में कहाः जब आबादी ज़्यादा होती है तो प्रतिस्पर्धा बढ़ती है जिसके नतीजे में मौजूद प्रतिस्पर्धाओं में विकास होता है।