26 जुलाई 2019 - 12:04
अमरीका के ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के चेयरमैन का अफ़ग़ानिस्तान का अचानक दौरा

अमरीका के ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के चेयरमैन जोज़फ़ डन्फ़र्ड अफ़ग़ानिस्तान के अचानक दौरे पर काबुल पहुंचे।

अफ़ग़ानिस्तान के अचनाक दौरे पर आए अमरीका के ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के चेयरमैन जोज़फ़ डन्फ़र्ड ने अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी से मुलाक़ात की, जिसमें अशरफ़ ग़नी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई की अग्रिम पंक्ति में है और हर दिन इस मार्ग में बलिदान दे रहा है। डन्फ़र्ड का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब काबुल-वॉशिंग्टन के बीच ट्रम्प के अपमानजनक बयान से तनाव अपने चरम पर है।

अशरफ़ ग़नी का डन्फ़र्ड से यह कहना कि अफ़ग़ानिस्तान आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में हर दिन क़ुर्बानी दे रहा है, इस देश में जंग के लंबा खिंचने व आतंकवाद के ख़िलाफ़ अमरीका की लड़ाई में वाइट हाउस की हार की ओर ध्यान दिलाने तथा तालेबान के साथ शांति वार्ता प्रक्रिया में रुकावट डालने की कोशिश है, क्योंकि वॉशिंग्टन के एकपक्षीय व मनमाने व्यवहार की वजह से अफ़ग़ान राष्ट्र के हित बहुत तेज़ी से ख़तरे मे पड़ गए हैं।

पिछले 18 साल में अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद और अशांति को नियंत्रित करने में नाकाम रहा है और पिछले 2 साल में उसने तालेबान के साथ द्विपक्षीय बातचीत की नीति अपनाकर अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रीय एकता की प्रक्रिया में काबुल सरकार को व्यवहारिक रूप से किनारे लगा दिया है। यही वजह है कि तालेबान काबुल सरकार से किसी भी तरह की बातचीत न करने पर अड़े हुए हैं।

ऐसे हालात में जब अफ़ग़ान जनता आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग में अमरीका की विरोधाभासी नीतियों का हर्जाना दे रही है, अमरीकी राष्ट्रपति के अपमानजनक बयान से वाइट हाउस का धूर्तता पर आधारित अस्ली चेहरा बेनक़ाब हो गया है जिसमें अफ़ग़ानिस्तान पर लगभग 2 दशकों से थोपी गयी जंग व हिंसा के बाद, अब इस देश की जनता का सर्वनाश करने की धमकी दी गयी है।

अफ़ग़ान जनता इस निष्कर्श पर पहुंच गयी है कि उसके देश में अमरीका और नेटो की मौजूदगी का कोई फ़ायदा नहीं है, बल्कि उनकी मौजूदगी से जंग लंबी खिंच रही है, क्योंकि तालेबान बारंबार कह चुके हैं कि जब तक इस देश में विदेशी हैं, जंग ख़त्म नहीं होगी।

इसलिए अमरीका को जो अफ़ग़ानिस्तान में जंग की समाप्ति और शांति की स्थापना का दावा करता है, चाहिए कि अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिकों को निकालने की समयावधि तय करके तालेबान के साथ शांति वार्ता के क्षेत्र में पहल करने का अवसर काबुल सरकार को दे दे।