24 जुलाई 2019 - 12:51
आयत क्या कहती है? क्या पैग़म्बर के आदेश के सामने, अन्य लोगों की राय का महत्व है?

पैग़म्बर अपने व्यक्तिगत व पारिवारिक हितों या आंतरिक इच्छाओं की पूर्ति के प्रयास में नहीं रहते।

सूरए अहज़ाब की आयत क्रमांक 6 का अनुवाद:

ईमान वालों पर पैग़म्बर का अधिकार स्वयं उनके अपने प्राणों से अधिक है और उनकी पत्नियां ईमान वालों की माएँ हैं। और ईश्वर की किताब में ख़ूनी रिश्तेदार, मोमिनों और पलायनकर्ताओं की अपेक्षा (विरासत प्राप्त करने में) एक-दूसरे के अधिक हक़दार हैं सिवाय इसके कि तुम अपने दोस्तों के साथ भलाई करना चाहो। यह आदेश (ईश्वरीय) किताब में लिखा हुआ है।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

ईमान वालों को सभी मामलों में पैग़म्बर के विचार को अपने विचार पर प्राथमिकता देनी चाहिए और उनका आज्ञापालन करना चाहिए। इस सूरे की 36वीं आयत में भी इस बात पर बल दिया गया है कि जब भी ईश्वर और उसके पैग़म्बर कोई आदेश दें तो फिर ईमान वाले व्यक्ति का उसके मुक़ाबले में कोई अधिकार नहीं रह जाता।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. पैग़म्बर, सभी ईमान वालों पर प्राथमिकता रखते हैं और उनका आदेश सभी व्यक्तिगत, पारिवारिक व सामाजिक मामलों में लागू है।
  2. पैग़म्बर की पत्नियों का सम्मान आवश्यक है और हर वह कथन या कार्य जो उनके अनादर का कारण बने, वैध नहीं है।

  3. इस्लामी संस्कृति में पारिवारिक व्यवस्था की मज़बूती के लिए ख़ूनी रिश्तों पर विशेष ध्यान दिया गया है।