दूसरे विश्व युद्ध के अंत के बाद, अमरीका के रक्षा विशेषज्ञों, सैन्य इतिहासकारों और राष्ट्रपतियों ने अमरीकी सेना को, सशस्त्र सेनाओं के इतिहास की सब से अधिक भयानक सेना बताया और धीरे धीरे यह विचारधारा अमरीकी समाज में फैल गयी और सब को इस पर विश्वास हो गया लेकिन अमरीकी वेबसाइट " डेली बीस्ट" ने अपनी एक रिपोर्ट में अमरीकी सेना की विफलताओं और पराजय का जायज़ा लिया है। जेम्स वारेन ने लिखा है कि " शीत युद्ध के दौरान, मास्को ने बताया कि उसके पास अमरीका जैसे सैन्य उपकरण और हथियार हैं, यह दावा किसी सीमा तक सही था किंतु सोवियत संघ के विघटन और सन 1990 में फार्स की खाड़ी के युद्ध में सद्दाम के खिलाफ अमरीका की विजय के बाद जहां तक मुझे मालूम है सैन्य क्षेत्र के किसी छात्र ने अमरीका की सैन्य वरीयता की सच्चाई को परखने का प्रयास नहीं किया। इतिहास की सब से अधिक शक्तिशाली सेना, दुनिया की सब से अधिक खर्च वाली सेना भी है। इस साल अमरीका, कम से कम 650 अरब डालर रक्षा क्षेत्र में लगाएगा, यह अमरीका के बाद विश्व के सात देशों के कुल रक्षा बजट के बराबर है।"
अमरीकी वेबसाइट डेली बीस्ट ने कोरिया युद्ध से वियतनाम और फिर अफगानिस्तान व इराक़ युद्ध में अमरीकी सेना की पराजय का उल्लेख करते हुए लिखा हैः " इन सब युद्धों पर ध्यान देने से हमारे मन में एक विचित्र व महत्वपूर्ण सवाल पैदा होता हैः इतिहास की सब से भयानक व विनाशक सेना, क्यों अपने युद्धों में विजयी नहीं हो पाती? ... बहुत से विश्लेषक, समस्या की जड़ को सेना की संस्कृति में बताते हैं। दूसरे विश्व यद्ध के बाद विशेष कर शीतयुद्ध के बाद अमरीका के बहुत से प्रतिद्धिंदी, गैर सरकारी व दक्ष विद्रोही रहे थे जिन्हें पारंपरिक सेनाओं से टक्टर लेने का बड़ा अनुभव था। आधुनिक हथियारों से लैस और पारंपरिक रूप से प्रशिक्षत अमरीकी सैनिक, इन लोगों से मुक़ाबला करने में बहुत सी समस्याओं का शिकार थे। यह स्थिति वियतनाम में स्पष्ट रूप में देखने को मिली, इसी प्रकार इराक के युद्ध में भी और इसी तरह बगदाद पर आसानी से क़ब्ज़े के बाद भी अमरीकी सेना ने एक जटिल विद्रोह के सामने स्वंय को बेबस पाया। "
डेली बीस्ट की रिपोर्ट में लिखा है कि " सैन्य क्षेत्रों के छात्रों ने हालिया युद्धों में अमरीका की परायज का मुख्य कारण, घमंड को समझते हैं। अमरीकी सांसदों और इसी तरह जनरलों ने अपने दुश्मनों को कम आंका है विशेषकर उनके डट जाने की शक्ति के बारे में गलत अनुमान लगाया है। राजनीति विशेषज्ञ डोमेनिक टेरेनी इस संदर्भ में व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि " हमारे पास शक्ति है और उनके पास संकल्प शक्ति है।" इन हालात में एन्ड्रो बासोविच, बेरी पोज़न और स्टीफन वाल्ट जैसे इतिहासकारों और विदेश संबंधों के विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य समस्या सेना में ही नहीं है बल्कि इस दशा के कारणों की खोज अमरीका के व्यापक नीतियों और रणनीतियों में करना चाहिए।