एक इस्राईली टीकाकार ने कहा है कि इस्राईल 36 वर्षों से हिज़्बुल्लाह के खिलाफ युद्ध में हार रहा है और सऊदी अरब भी हौसियों के साथ युद्ध में नाकाम रहा है।
इस्राईली टीकाकार यारून फ्रेडमैन का मानना है कि यमन में युद्ध विदित रूप से इस्राईल से दूर पैदा होने वाला एक संकट है और उससे संबधिंत नहीं है लेकिन विभिन्न कारणों से यह युद्ध इस्राईल के लिए बहुत महत्वपूर्ण होना चाहिए।
फ्रेड मैन ने इस्राईली समाचार पत्र यदीऊद अहारोनूत में अपने आलेख में लिखा है कि इस्राईल और सऊदी अरब, क्षेत्र में अमरीका के दो घटक हैं और दोनों को ही ईरान से निकली शाखाओं अर्थात, हिज़्बुल्लाह और हौसी से माना करना पड़ रहा है और इन से युद्ध के लिए बहुत समय भी चाहिए। इन दोनों संगठनों को एक वार में खत्म नहीं किया जा सकता। इस्राईल ने 36 साल पहले हिज़्बुल्लाह के खिलाफ युद्ध आरंभ किया था लेकिन आज तक उसे यह भी नहीं मालूम कि यह युद्ध कब खत्म होगा? तो फिर सऊदी अरब कैसे सफल हो सकता है?
इस्राईली टीकाकार फ्रेडमैन ने लिखा है कि यमन के ईरान की छावनी बन जाने से केवल सऊदी अरब को ही खतरा नहीं है बल्कि यह अदन और बाबुल मन्दब स्ट्रेट से लाल सागर जाने वाले आयल टैंकरों के मार्ग के लिए भी खतरा है जिससे पूरी दुनिया की अर्थ व्यवस्था को नुक़सान पहुंच सकता है। सऊदी अरब ने यमन के हौसियों के खिलाफ गठबंधन बनाया है किंतु सऊदी अरब और यूएई के युद्धक विमान इस युद्ध को निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंचा सकते।
इस इस्राईली टीकाकार ने लिखा है कि यमन में युद्ध ने सऊदी अरब में हालात खराब कर दिये अब जब भी सऊदी अरब यमन पर बमबारी करता है सदयों मिसाइल दक्षिणी सऊदी अरब पर गिरते हैं और हौसियो के मिसाइलों ने सऊदी अरब की नींद उड़ा दी है। हौसियों के पास तो एसे ड्रोन विमान भी हैं जो विस्फोटक सामाग्री ले जा सकते हैं। फ्रेडमैन ने लिखा है कि यमन का युद्ध जारी रहा तो सऊदी अरब की सेना और छवि को काफी नुक़सान पहुंचेगा क्योंकि इसका अर्थ मध्य पूर्व की बेहद शक्तिशाली सेना की हौसी जैसे एक कमज़ोर संगठन से पराजय है। यह वही स्थिति है जो हिज़्बुल्लाह के बारे में इस्राईल को परेशान करती है। लेबनान के दूसरे युद्ध में जिस तरह से हिज़्बुल्लाह ने मुक़ाबला किया है वह उसके लिए एक विजय थी क्योंकि इस्राईल हिज़्बुल्लाह को खत्म करने में नाकाम रहा।
इस्राईली टीकाकर फ्रेडमैन ने लिखा है कि हिज़्बुल्लाह इस्राईल के भिड़ने के लिए तैयार है बस समय का इंतेज़ार कर रहा है और इस्राईल के खिलाफ अगला मोर्चा, गोलान में खोलेगा जहां सड़कों से उसे ज़रूरी सामान मिलता रहेगा। तेहरान को भी आशा है कि वह इराक़ के मार्ग से ईरान से लेकर सीरिया तक सड़क संपर्क बनाने में सफल होगा अब अगर अमरीकी सैनिक उत्तरपूर्वी सीरिया से निकल जाते हैं तो ईरान का यह उद्देश्य आसानी से पूरा हो जाएगा।
इस इस्राईली टीकाकार ने अंत में लिखा हैः सऊदी अरब की समस्या, इस्राईल की भी समस्या है। हौसी व हिज़्बुल्लाह क्षेत्र में ईरान की शाखाएं हैं जैसा कि हिज़्बुल्लाह, हौसियों के युद्ध से बहुत कुछ सीख रहा है इसर्ईल को भी सऊदी अरब की सफलताओं और विफलताओं से पाठ लेना चाहिए और कितना अच्छा होता अगर इस्राईल व सऊदी अरब, शिया संगठनों के खिलाफ युद्ध में एक दूसरे के साथ सहयोग करते। क्या इस्राईल इसके लिए उस समय का इंतेज़ार करे जब हिज़्बुल्लाह एक युद्ध आरंभ कर दे? यह निश्चित रूप से ईरान की एक बड़ी विजय है।