3 जुलाई 2019 - 14:01
तो क्या ईरान की तरह सीरिया इस्राईल को जवाब देने वाला है? कैसा ताला लगाया ईरान ने लोगों की ज़बान पर ? बताया अब्दुलबारी अतवान ने..

फार्स की खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच जब से ईरान ने सफलता के साथ अमरीका के आधुनिक ड्रोन विमान को मार गिराया है, सीरिया के खिलाफ इस्राईल के हमले बढ़ गये हैं लेकिन हालिया हमले में इस्राईली युद्धक विमान, सीरिया की वायु सीमा में नहीं घुसे बल्कि उन्होंने लेबनान की वायु सीमा से ही सीरिया में सात मिसाइल दागे।

 सीरिया पर इस्राईल का हालिया हमला, निश्चित रूप से रूस के लिए परेशानी का कारण बनेगा क्योंकि यह हमला, रूस, अमरीका और इस्राईल के सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के एक हफ्ते बाद ही हुआ। इस बैठक में सीरिया में ईरान की उपस्थिति पर विशेष रूप से चर्चा की गयी।

     जानकारी के अनुसार इस्राईल में होने वाली इस बैठक में रूस के सुरक्षा सलाहकार ने यह कह कर अपने अमरीकी और इस्राईली को चौंका दिया कि ईरान मास्को का घटक और भागीदार है और उसकी छवि बिगाड़ना और उसे क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा दर्शना अस्वीकारीय है क्योंकि ईरान, आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।

      यह वास्तव में रूस की तरफ से, अमरीका और इस्राईल के लिए यह संदेश था कि वह सीरिया से ईरान को निकालने की उनकी इच्छा का समर्थन नहीं करता।

 वैसे ध्यान योग्य बात यह है कि सीरिया में इस्राईल के हालिया हमलों को रोकने के लिए रूस के एस-300 सिस्टम को प्रयोग नहीं किया बल्कि एस-200 का प्रयोग किया जिससे यह पता चलता है कि रूस अब भी सीरिया को इस्राईल के खिलाफ एस-300 एंटी मिसाइल सिस्टम के प्रयोग से रोक रहा है लेकिन सवाल यह है कि रूस सीरिया को कब तक रोकेगा? जबकि यह भी स्पष्ट है कि रूस ने सीरिया को यह आधुनिक एन्टी मिसाइल सिस्टम, सीरिया के आकाश में अपने विमान के मार गिराए जाने के बाद दिया था जिसमें उसके कई विशेषज्ञ मारे गये और और रूस ने इस का ज़िम्मेदार, इस्राईल को बताया था।

     इस बार इस्राईल ने लेबनान की वायु सीमा से ही सीरिया पर मिसाइल दागे लेकिन अगर सीरिया एस-300 का इस्तेमाल कर सकता होता तो वह बड़ी आसानी से लेबनान की वायु सीमा में ही इस्राईल युद्धक विमानों को मार गिराता क्योंकि एस-300 मिसाइल सिस्टम, 300 किलोमीटर तक किसी भी मिसाइल या विमान को भेद सकता है और लेबनान की सीमा तो इससे बहुत निकट है।

     इस प्रकार से हमलों से इस्राईल का उद्देश्य, सीरिया और ईरान को भड़काना है ताकि वह भड़क कर कुछ एसा कर दें जिससे युद्ध भड़क जाए और नेतेन्याहू की हार्दिक इच्छा, युद्ध ही है अलबत्ता एसा युद्ध जिसे वह दूर- दूर से देख कर तालियां बजा सकें।

 यह तो निश्चित है कि इस्राईल के इस प्रकार के आक्रमण का सीरिया की ओर से जल्द ही जवाब दिया जाएगा, यह जवाब कभी भी हो सकता है और सब को चौंका देने वाला भी होगा। सीरिया निश्चित रूप से यह काम रुस को विश्वास में लेकर करेगा। कुछ दिन पहले तक ईरान की इस बात पर आलोचना की जा रही थी कि वह सीरिया में, इस्राईली हमलों पर चुप है और इस्राईल को जवाब नहीं दे रहा है लेकिन ईरान ने आलोचकों की मूर्खता को सिद्ध कर दिया क्योंकि उसने इस्राईल को नहीं, बल्कि उसके बड़े समर्थक, अमरीका को जवाब दिया। ईरान ने यह जवाब, कुछ ही मीटर अपनी वायु सीमा में घुसने वाले अत्याधुनिक अमरीकी ड्रोन विमान को तबाह करके दिया।

   कहते हैं कि ईरान द्वारा अमरीकी ड्रोन मार गिराए जाने के बाद, अमरीका की ओर से ईरान को जवाब न दिया जाना, इस्राईली प्रधानमंत्री, नेतेन्याहू की कोशिशों का परिणाम था, उन्होंने ट्रम्प को मनाया कि वह ईरान पर हमला न करें क्योंकि वह ईरान और उसके घटकों की ओर से दसियों हज़ार मिसाइलों की बारिश से डर गये थे क्योंकि एक साथ दसियों हज़ार मिसाइल निश्चित रूप से इस्राईल को तबाह करने की शक्ति रखते हैं। इस लिए हम कहते हैं कि जिस तरह से ईरान ने अचानक ने मुंहतोड़ जवाब दिया है उसी तरह से सीरिया भी इस्राईल को मुंहतोड़ जवाब देगा , बस समय समय की बात है, और जिस तरह से ईरान के जवाब ने बहुत से लोगों के मुंह पर ताला लगा दिया है उसी तरह सीरिया भी जवाब देकर लोगों की ज़बान बंद कर देगा, हमें तो यही उम्मीद है।

      जो देश, अमरीकी नेतृत्व में 70 सरकारों के मुक़ाबले में 8 वर्षों तक डटरा रहा, अपने देश की अधिकांश भूमि को आतंकवादियों से वापस लेने में सफल रहा वह इस्राईल की इन कार्यवाहियों का सटीक उत्तर देने में भी सक्षम होगा विशेषकर इस लिए भी प्रतिरोध मोर्चे के हित में हर तरफ से समीकरण बड़ी तेज़ी के साथ बदल रहे हैं। (Q.A.) साभार रायुल यौम