ब्रिटेन के विदेशमंत्री जेरेमी हंट ने, जो टेरीज़ा मे के बाद इस देश में प्रधानमंत्री पद की होड़ में शामिल हैं, अपने एक बयान में ईरान के ख़िलाफ़ संभावित सैन्य कार्यवाही में अमरीका से सहयोग की बात की लेकिन उनके बयान पर आने वाली कड़ी प्रतिक्रियाओं के कारण उन्हें स्पष्ट रूप से पीछे हटते हुए कहा कि अमरीका व ईरान के बीच संभावित टकराव में ब्रिटेन शामिल नहीं होगा। उन्होंने इस बात की ओर इशारा करते हुए कि लंदन को इस बता की अपेक्षा नहीं है कि वाॅशिंग्टन उसे ईरान के साथ संभावित सैन्य टकराव में शामिल होने के लिए कहेगा, कहा कि अमरीका, लंदन का सबसे निकट सहयोगी है लेकिन यह नहीं सोचा जा सकता कि वह हमसे एक युद्ध में शामिल होने के लिए कहेगा।
यूरोपीय परिषद के प्रमुख डोनल्ड टस्क ने भी कहा है कि यूरोपीय संघ को फ़ार्स की खाड़ी में अमरीका की तनाव पैदा करने वाली कार्यवाहियों पर अत्यधिक चिंता है लेकिन वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। वास्तविकता यह है कि ब्रिटेन ने हालिया दशकों में क्षेत्र में अमरीका की युद्ध भड़काने वाली नीतियों में भाग लेकर न केवल यह कि बहुत अधिक नुक़सान उठाया है बल्कि उसे विश्व जनमत और मानवाधिकार संगठनों की कड़ी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है। इसका एक उदाहरण यमन युद्ध है। ब्रिटिश संसद के सदस्य एंड्रू मिचल का कहना है कि यमन की स्थिति पीड़ादायक है और निश्चित रूप से ब्रिटेन इस अपराध में सहभागी है। अब ऐसा प्रतीत होता है कि जेरेमी हंट ने भी अपने बयान से पलटी मार कर ब्रिटिश जनमत को ख़ुश करने और प्रधानमंत्री पद हासिल करने के लिए अपनी संभावना बढ़ाने की कोशिश की है।