1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से ही अमरीका, ईरान का भय दिखाकर इन देशों के आर्थिक स्रोतों से लाभ उठा रहा है और अरबों डॉलर के हथियार बेच रहा है।
हाल ही में ईरान के तेल निर्यात पर अमरीका के एकपक्षीय प्रतिबंधों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिसके बाद अमरीका ने क्षेत्र में विमान वाहक युद्धपोत तैनात कर दिया है और अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाने की घोषणा की है।
इसी के साथ अमरीकी राष्ट्रपति ने ईरान को बातचीत का प्रस्ताव दिया है, लेकिन ईरान ने अमरीका के वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाए, फ़ार्स खाड़ी के अपने पड़ोसी देशों को हमले में पहल न करने के समझौते का प्रस्ताव दिया है।