हमें नहीं लगता कि दोनों में से कोई एक उद्देश्य भी पूरा हो सकता है क्योंकि पहली बात तो यह है कि ट्रम्प सरकार, युद्ध से डर रही है, दूसरी बात यह कि ईरान अपना रवैया बदलने वाला बिल्कुल नहीं है, तीसरी बात यह कि यदि ईरान के रवैये में इस प्रकार का कोई बदलाव आता है तो वह उसके अंत के अर्थ में होगा और चौथी बात यह कि ट्रम्प, एक डरपोक और झूठे व धोखेबाज़ व्यापारी हैं।
एसा हम इस लिए कह रहे हैं कि क्योंकि हमें पता है कि ईरानी नेतृत्व यह बहुत अच्छी तरह से जानता है कि इराक़ युद्ध का विरोध करने वाले और मध्य पूर्व से अमरीकी सैनिकों की वापसी की मांग करने वाले अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प में इतना साहस ही नहीं है कि वह ईरान के खिलाफ एसा युद्ध छेड़ दें जिसके परिणाम का किसी को अनुमान भी नहीं है। इस लिए हम कहेंगे कि जो गरजते हैं वह बरसते नहीं।
हम यह मानते हैं कि अमरीका एक सुपर पावर है और ईरान में तबाही मचा सकता है जैसा कि उसने इराक़ में तबाही फैलायी है लेकिन इस प्रकार के किसी भी से वह भी घावों से चूर चूर ही बाहर निकल पाएगा । एसे समय में जब विश्व स्तर पर बड़ी बड़ी शक्तियों के मध्य टकराव की संभावना बढ़ रही है अमरीका के लिए अपनी प्रतिष्ठा और सैन्य शक्ति की रक्षा करना बहुत ज़रूरी है। अमरीका न इराक़ को नक्शे से मिटा पाया न ही इराक़ को और न वियतनाम को।
अमरीका का विमान वाहक पोत अबराहम लिंकन को अमरीकी राष्ट्रपति ने फार्स की खाड़ी में अपनी शक्ति प्रदर्शन के लिए भेजा था, लेकिन वह बहुत जल्दी लौट गया और अब ईरानी तट से 700 किलोमीटर की दूरी पर चक्कर लगा रहा है क्योंकि उसे ईरान की उन मिसाइलों से खतरा है जो उसे पूरी तरह से तबाह कर सकती हैं। यह भी बता दें कि इस प्रकार के विमान वाहक पोत की तैयारी में कम से कम 30 अरब डालर का खर्चा आता है जबकि उसे तबाह करने वाली ईरानी मिसाइल, कुछ हज़ार डालर की ही होती है। हमारे पास विश्वस्त सूत्रों से एसी बहुत सी जानकारियां हैं जिनसे पता चलता है कि ईरान के पास कितनी सैनिक शक्ति है और यही ईरान की सैन्य शक्ति, अमरीका के धमकी भरे स्वर में बदलाव का मुख्य कारण है। अमरीकी स्वर में बदलाव के कुछ कारण यह हैः
ईरान मध्य और कम दूरी के एसे मिसाइल बनाता है जो ध्वनि गति से तेज़ हैं और बहुत सही सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदते हैं। ईरान द्वारा बनाए गये इन मिसाइलों की बड़ी संख्या, इराक़, लेबनान और यमन में ईरान के घटकों तक पहुंच गयी है।
ईरान के पास दस हज़ार से अधिक स्पीट बोट हैं जो बहुत सी तेज़ी के साथ हमला करती हैं। इन में बेहद छोटी स्पीट बोट भी शामिल हैं जिन्हें अमरीकी युद्धपोतों के खिलाफ आत्मघाती कार्यवाही के लिए बड़ी आसानी से प्रयोग किया जा सकता है। इन सब में ईरान की वह मिसाइलें शामिल ही नहीं हैं जिन्हें उसने अभी तक प्रयोग ही नहीं किया और निश्चित रूप में जब वह प्रयोग करेगा तो सब चौंक जाएंगे।
ईरान के खिलाफ युद्ध का सब से अधिक ढिंढोरा पीटने वाले इस्राईली प्रधानमंत्री नेतेन्याहू आज कल चुप्पी साधे हैं जिसकी वजह यह नहीं है कि वह सरकार के गठन में व्यस्त हैं। यह वजह भी नहीं कि उन्हें अरब देशों में इस युद्ध से होने वाली तबाही की चिंता है बल्कि उन्हें अपना झूठ पकड़े जाने और मज़ाक उड़ाए जाने का खतरा है क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी क्षमता से अमरीकी कांग्रेस को यह विश्वास दिलाया था कि अगर इराक़ में सद्दाम को हटाया नहीं गया तो वह परमाणु हथियार बना लेंगे और अगर सद्दाम को हटा दिया गया तो मध्य पूर्व में शांति स्थापित हो जाएगी, उनके दोनों दावे बुरी तरह से झूठे साबित हो चुके हैं इस लिए वह अब ईरान के बारे में भी इस प्रकार के दावे लेकर कांग्रेस के सामने जाने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। इसके अलावा इस्राईली प्रधानमंत्री को ईरान की सैन्य शक्ति का भी अदांजा है और उन्हें मालूम है कि ईरानी मिसाइल का एक हिस्सा, चाहे सीधे रूप में या फिर इलाक़े में ईरान के घटकों द्वारा, तेलअबीब , हैफा और याफा सहित विभिन्न नगरों पर बरसेगा ज़रूर।
उन्हें नुकसान होगा। इस बारे में हमें वियतनाम, इराक़ और अफगानिस्तान में बहुत से उदाहरण मिल जाएंगे।
अमरीकी चालें विफल हो चुकी हैं, मनोवैज्ञानिक युद्ध का उल्टा असर हो रहा है, ट्रम्प की ओर से आर्थिक युद्ध भी प्रभावशाली सिद्ध नहीं होगा, ईरानी नेता हाथ पर हाथ धरे, अपने देश की जनता को भुखा नहीं देख सकते वह बड़ी आसानी से हुरमुज़ स्ट्रेट बंद कर देंगे जिससे एक करोड़ 80 लाख बैरल की तेल की आपूर्ति दुनिया के लिए रुक जाएगी जिसके बाद पूरी दुनिया में तेल पर हाहाकार मच जाएगा।
अमरीका, कहता है कि वह ईरान को अपना रवैया बदलने पर मजबूर कर देगा मगर हमारे विचार में यह ईरान है जो अमरीका अपना व्यवहार बदलने पर मजबूर कर देगा। ईरान के पास खोने के लिए कुछ नहीं है लेकिन अमरीका और इलाक़े में उसके घटकों के पास खोने के लिए बहुत कुछ है। अमरीका और उसके घटकों को, सैन्य शक्ति का दबदबा, आर्थिक स्थिरता जैसी चीजों को गंवा देने का खतरा है। ईरानी सेना के प्रमुख जनरल मूसवी ने कहा है कि ईरान ने मध्यस्थता करने वाले छोटे- बड़े सभी मधयस्थों से कह दिया है कि ईरान वार्ता उसी दशा में स्वीकार करेगा जब अमरीका का रवैया बदले! ... क्या यह संदेश अमरीका को मिल गया है? आशा है कि मिल गया होगा।