23 मई 2019 - 13:28
राष्ट्रपति असद ने सीरिया और तुर्की के सुरक्षा अधिकारियों की मुलाक़ात का क्यों किया एलान? क्या एस-400 पर अमरीकी दबाव के बाद तुर्क

आजकल तुर्की की नीतियों की यह हालत है कि पर्यवेक्षकों के लिए उन्हें समझ पाना और उनके बारे में अनुमान लगा पाना कठिन हो गया है इसलिए की नीतियों में बढ़ी अस्पष्टता और अस्थिरता नज़र आती है।

जहां यह पुष्ट ख़बरें आ रहे हैं कि सीरिया और तुर्की के बीच सुरक्षा अधिकारियों के मध्य संपर्क हुए हैं और अति संवेदनशील मुद्दों पर दोनों देशों के बीच समन्वय बनाने की बात हुई है वहीं यह ख़बरें भी हैं कि तुर्की की सरकार  सीरिया के भीतर लड़ रहे चरमपंथी संगठन अन्नुस्रा की भारी मदद भी कर रही है जिसे अतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। इस बीच यह ही सच्चाई है कि अन्नुस्रा तथा अन्य चरमपंथी संगठनों के नियंत्रण वाले इलाक़ो को आज़ाद कराने के लिए सीरियाई सेना के आप्रेशन में तुर्की की ओर से कोई रुकावट नहीं डाली जा रही है।

तुर्क पत्रकार मुहम्मद यूफ़ा ने जो इडी लिंक अख़बार के लिए काम करते हैं सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद से तुर्की के राजनेताओं और पत्रकारों के एक समूह की मुलाक़ात के बारे में बताया है जिनका संबंध तुर्की के विपक्षी दलों और कई अखबारों से है। यह मुलाक़ात 8 मई को दमिश्क़ में हुई। मुलाक़ात में बश्शार असद ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि हम तुर्क अधिकारियों से रूसी अधिकारियों के माध्यम से ही बात नहीं कर रहे हैं बल्कि वरिष्ठ कमांडरों की सतह पर प्रत्यक्ष बातचीत भी हो रही है। पत्रकार के अनुसार राष्ट्रपति असद ने दो महत्वपूर्ण मुलाक़ातों के बारे में बताया। यह मुलाक़ात तुर्की के इंटेलीजेन्स प्रमुख हाकान फ़ीदान और सीरिया के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के बीच हुई। पहल मुलाक़ात तेहरान में और दूसरी मुलाक़ात कसब सीमावर्ती चेकप्वाइंट पर हुई। राष्ट्रपति असद ने कहा कि तुर्की के सैनिक कमांडर सीरिया के आंतरिक हालात को तुर्की के राजनेताओं से ज़्यादा बेहतर अंदाज़ में समझते हैं।

इन सूचनाओं से यह पता चलता है कि तुर्की ने पड़ोसी देशों के साथ ज़ीरो विवाद की रणनीति की ओर लौटना शुरू कर दिया है, विशेष रूप से सीरिया के बारे में उसे यही रणनीति अब उचित नज़र आ रही है। क्योंकि अमरीका के साथ तुर्की का विवाद बहुत बढ़ चुका है। एस-400 मिसाइल ढाल व्यवस्था ख़रीदने के मुद्दे पर अंकारा और वाशिंग्टन के बीच विवाद कम करने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं।

अगर अमरीकी टीवी चैनल सीएनबीसी की रिपोर्ट को ही माना जाए तो अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान को दो सप्ताह का समय दिया है और कहा कि इस अवधि में वह रूस से एस-400 मिसाइल ढाल व्यवस्था ख़रीदने का अपना फ़ैसला बदल लें वरना अमरीका तुर्की पर आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा। वैसे लगता है कि यह रिपोर्ट सही है क्योंकि अमरीका ने पहले ही तुर्की के ख़िलाफ़ आर्थिक मैदान में लगातार हमले कर रहा है और तुर्की के निर्यात को नुक़सान पहुंचा रहा है।

तुर्की ने जैसा कि इस देश के रक्षा मंत्री खलूसी आकार ने कहा है रूस के साथ होने वाली डील से हरगिज़ पीछे नहीं हटेगा बल्कि आगे ही बढ़ता रहेगा। तुर्की ने अपनी एक टीम मास्को भेज दी है जो वहां एस—400 मिसाइल ढाल सिस्टम के प्रयोग की ट्रेनिंग ले रही है। इसका मतलब यह है कि अमरीका और तुर्की का टकराव क़रीब है। हो सकता है कि यह टकराव कुछ हफ़्तों या कुछ दिनों के ही भीतर नज़र आने लगे।

इन तीव्र परिवर्तनों के बीच तुर्की के सामने दो रास्ते बचते हैं। एक रास्ता यह है कि वह दमिश्क़, बग़दाद और तेहरान की ओर बढ़े और दूसरी तरफ़ मास्को से भी सहयोग बढ़ाए। क्या हम बहुत जल्द यह देखेंगे कि तुर्की इन दोनों दिशाओं में आगे बढ़ रहा है?

हम गहरे क्षेत्रीय समीरकणों और रणनीतियों के आधार पर कहते हैं कि तुर्की यही क़दम उठाने जा रहा है। क्योंकि सीरिया संकट के बारे में उसकी इससे पहले की नीति ने उसे भारी नुक़सान पहुंचाया है।

साभार रायुल यौम