फ़िलिस्तीन समस्या को लेकर ट्रम्प अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों को लगातार नज़र अंदाज़ कर रहे हैं। ख़ास तौर से इस्राईल के हितों की रक्षा के लिए तैयार की गई तथाकथित डील ऑफ़ द सेंचरी के रूप में पूर्ण रूप से एकपक्षीय समझौता करना चाहते हैं।
रूस ने ट्रम्प के इन प्रयासों पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने शनिवार 18 मई को फ़िलिस्तीनी सरकार के प्रमुख महमूद अब्बास को एक पत्र लिखा और फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों के समर्थन का आश्वासन दिया।
रामल्लाह में रूस के राजदूत हैदर आग़ानीन ने यह पत्र अब्बास को सौंपा। पुतिन ने इस पत्र में लिखा, रूस संयुक्त राष्ट्र संघ और अंतरराष्ट्रीय नियमों को पैरों तले रौंदे जाने के लेकर चिंतित है। डील ऑफ़ द सेंचरी की ओर संकेत करते हुए पुतिन ने लिखा, रूस फ़िलिस्तीन की अंतरराष्ट्रीय वैधता का समर्थन करता है।
ट्रम्प ने डील ऑफ़ द सेंचरी को लागू करने के लिए अपनी भरपूर ताक़त झोंक दी है। इस समझौते के तहत इस्राईल को अतीत में किए गए समस्त समझौतों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों से कहीं आगे बढ़कर विशिष्टताएं देने की बातें कहीं गई हैं, यहां तक कि 1967 में क़ब्ज़ा किए गए समस्त फ़िलिस्तीनी इलाक़ों पर इस्राईल के क़ब्ज़े का मान्यता देने और उनका इस्राईल में विलय करने पर बल दिया गया है। इसके अलावा फ़िलिस्तीनियों को बैतुल मुक़द्दस से हाथ धोना होगा और फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों को घर वापसी का अधिकार नहीं होगा। परिणाम स्वरूप, एक ऐसे फ़िलिस्तीनी देश का गठन किया जाएगा, जिसका क्षेत्रफल बहुत ही सीमित होगा और जिसे किसी भी एक देश को प्राप्त होने वाले महत्वपूर्ण अधिकार हासिल नहीं होंगा।
हालांकि समस्त फ़िलिस्तीनियों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए ऐसे किसी भी समझौते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।