इराकी मामलों में राष्ट्रसंघ के विशेष दूत जेनीन हेनीस प्लासचर्ट ने तेहरान में विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ से भेंटवार्ता की।
इस भेंटवार्ता में दोनों पक्षों ने आतंकवादी गुट दाइश सहित दूसरे आतंकवादी गुटों की स्थिति, इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीसी और क्षेत्र में कुछ देशों की ओर से नफरत फैलाये जाने और उत्तेजक कार्यवाहियों के बारे में विचारों का आदान -प्रदान किया।
यह विचार विमर्श ऐसी स्थिति में हुआ जब पिछले सप्ताह सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ और दुस्साहसी कार्यवाही में सिपाहे पासदारान को एक आतंकवादी दल बताया परंतु अमेरिका की ओर से की जाने वाली उत्तेजक कार्यवाहियों, ईरान-इराक के बीच दूरी उत्पन्न करने के लिए अमेरिका की ओर से डाले जा रहे दबाव के बावजूद आज ईरानी और इराकी अधिकारियों के बीच मज़बूत व घनिष्ठ संबंध हैं।
इराकी प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल मेहदी ने अपनी हालिया तेहरान यात्रा में कहा था कि दोनों देशों के संबंध विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और क्षेत्र को देशों के मध्य दोस्ती और सहकारिता के मैदान में परिवर्तित कर देना चाहिये और दूसरों को फूट डालने और एक दूसरे से दूर करने की अनुमति नहीं देनी चाहिये।
इराकी प्रधानमंत्री से भेंट में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा था कि इराक में अमेरिका की सैनिक उपस्थिति का लक्ष्य सैनिक लक्ष्य से बढ़कर है।
इसी प्रकार वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा था कि इराक के बारे में अमेरिकी और सऊदी अधिकारियों के बयान उनकी दिली नियत से भिन्न हैं। वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब दाइश ने मोसिल पर कब्ज़ा कर लिया था तो वे उसके लिए हथियार, पैसा और दूसरे सामान भेजते थे और अब जब इराक ने दाइश को मात दे दी है तो वे दोस्ती की बात करते हैं।
स्पष्ट है कि अमेरिका ईरान और इराक के मध्य मित्रतापूर्ण संबंध और निकटता को अपने लिए हानिकारक समझता है।