5 अप्रैल 2019 - 12:49
सऊदी अरब को अमेरिकी समर्थन इस देश के संविधान का खुला उल्लंघन हैः बर्नी सेन्डर्ज़

अमेरिका सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री करने वाला सबसे महत्वपूर्ण देश है

यमन पर सऊदी अरब ने जो पाश्विक हमला आरंभ कर रखा है वह ऐसी स्थिति में पांचवें साल में दाखिल हो गया है जब यह विषय अमेरिकी कांग्रेस और वाइट हाउस के मध्य मतभेद का विषय बन गया है।

अमेरिका इस युद्ध में सऊदी अरब का विभिन्न प्रकार का समर्थन करके महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यही नहीं अमेरिका इस युद्ध में सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के युद्धक विमानों के ईंधन की आपूर्ति करता है और उन्हें विभिन्न प्रकार की सूचना सहायता भी प्रदान करता है।

यद्यपि नवंबर वर्ष 2018 में पेंटागॉन ने कहा था कि अब उसने सऊदी युद्धक विमानों के ईंधन की आपूर्ति खत्म कर दी है परंतु सऊदी गठबंधन अब भी अमेरिका की सैनिक सहायता और जानकारी पर निर्भर है।

बहरहाल अक्तूबर वर्ष 2018 में सऊदी अरब की तानाशाही सरकार के क्रिया-कलापों के आलोचक पत्रकार जमाल खाशुकजी की हत्या के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर प्रतिक्रिया जताई गयी थी और अमेरिका के भीतर भी इस बात की मांग उठी थी कि यमन युद्ध में अमेरिका द्वारा सऊदी अरब को दिया जा रहा समर्थन बंद किया जाना चाहिये।

इसी परिप्रेक्ष्य में गुरूवार को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसके आधार पर अमेरिका को चाहिये कि वह यमन युद्ध में सऊदी गठबंधन का समर्थन बंद करे। इस प्रस्ताव के पक्ष में 247 जबकि विरोध में 175 मत पड़े। इस प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति का आह्वान किया गया है कि वह 30 दिनों के भीतर समस्त अमेरिकी सैनिकों को यमन युद्ध से वापस बुला लें।

यह प्रस्ताव पिछले महीने 13 मार्च को अमेरिकी सिनेट में पारित हो गया था और रिपब्लिकन पार्टी के 7 सिनेटरों सहित 54 सिनेटरों ने इसके पक्ष में जबकि 46 ने इसके खिलाफ वोट दिया था। निर्दलीय सिनेटर बर्नी सेन्डर्ज़ ने इस संबंध में कहा कि कांग्रेस ने अमेरिका को इस युद्ध में भागीदारी की अनुमति नहीं दी है और यह खुल्लम- खुल्ला अमेरिकी संविधान का उल्लंघन है।

अपेक्षा इस बात की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस कानून को वीटो करेंगे क्योंकि वाइट हाउस ने इसकी आलोचना की है और उसे त्रुटिपूर्ण प्रस्ताव बताया है और कहा है कि इससे सऊदी अरब सहित क्षेत्रीय देशों के साथ अमेरिका के द्वीपक्षीय संबंध प्रभावित होंगे।

ज्ञात रहे कि अमेरिका सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री करने वाला सबसे महत्वपूर्ण देश है और अमेरिका द्वारा सऊदी अरब को विभिन्न प्रकार के हथियारों के दिये बिना यमन पर हमला और बमबारी संभव नहीं थी और जब तक सऊदी अरब को अमेरिकी आशीर्वाद प्राप्त रहेगा तब तक यमन पर सऊदी अरब के पाश्विक हमलों के बंद होने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।