इस्हाक़ आले हबीब ने कहा है कि इस्लामोफोबिया, घृणा फैलाने और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष की राह पर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा की बैठक में , न्यूज़ीलैंड की 2 मस्जिदों पर हमले की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान इस आतंकवादी हमले की कड़ाई के साथ निंदा करता है और पीड़ितों के प्रति हार्दिक संवेदना प्रकट करता है।
महासभा की बैठक का विषय नस्लभेद, भेदभाव और पलायनकर्ताओं के विरुद्ध भावना के खिलाफ संघर्ष था।
संयुक्त राष्ट्र संघ में इस्लामी गणतंत्र ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि असंख्य लोग नस्लभेद, भेदभाव और पलायनकर्ताओं के विरुद्ध भावना और इस्लामोफोबिया की यथावत बलि चढ़ रहे हैं।
आले हबीब ने कहा कि यह घटनाएं इस सच्चाई का चिन्ह हैं कि विश्व समुदाय आतंकवाद, नस्लभेद और असमानता के विरुद्ध संघर्ष के अपने आरंभिक उद्देश्य की पूर्ति में ही नाकाम रहा है।
उन्होंने न्यूज़ीलैंड में हमला करने वाले आतंकवादी की भाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भाषा, वही घृणात्मक भाषा है जो कुछ पश्चिमी देशों के संचारमाध्यमों में कट्टरपंथी राजनेताओं द्वारा प्रचारित व प्रसारित की जाती है