इस दो दिवसीय बैठक में ईरान के वित्तमंत्री फरहाद देजपसंद भाग ले रहे हैं। इस बैठक में पूंजी निवेश, व्यापार, वित्तीय, बैंकिन्ग और ऊर्जा आदि क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहकारिता को विस्तृत करने के मार्गों की समीक्षा की जायेगी।
पश्चिम एशिया में ईरान की विशेष परिस्थिति इस बात का कारण बनी है कि उसने ईरान को क्षेत्र की ट्रांज़िट कड़ी में परिवर्तित कर दिया है और ईरान की विशेष ट्रांज़िट परिस्थिति के दृष्टिगत ईरान और चीन ने काफी पूंजी- निवेश किया है और दोनों देश एक वर्ष में व्यापारिक लेन- देन को 60 अरब डालर तक पहुंचाना चाहते हैं।
इसके अलावा चीन ऊर्जा का एक बहुत बड़ा बाज़ार है। इसी कारण ईरान ने तेल व गैस को चीन निर्यात को प्राथमिकता दे रखी है।
चीन के पेट्रोकेमिकल और तेल उद्योग के अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन के महानिदेशक ने कहा है कि चीनी कंपनियों को हर परिस्थिति में ईरानी तेल की आवश्यकता है और चीन उसकी खरीदारी को जारी रखेगा और यह चीन और ईरान के बीच एक सामान्य बात है और उसका अमेरिका से कोई संबंध नहीं है।"
चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग ने भी अभी हाल ही में ईरानी संसद सभापति डाक्टर अली लारीजानी से बीजिंग में होने वाली भेंट में बल देकर कहा था कि क्षेत्र और विश्व की परिस्थिति जितना भी परिवर्तित हो जाये परंतु ईरान से स्ट्रैटेजिक संबंध बनाने के संदर्भ में चीन का इरादा परिवर्तित नहीं होगा।
इस समय हम नये दौर में जिन्दगी गुजार रहे हैं और विश्व में अमेरिका का आर्थिक एकाधिकार समाप्त हो चुका है और वाशिंग्टन के अंदर वास्तविकताओं को बदलने की क्षमता नहीं है और वह समय बीत गया है कि जब यह सोचा जाता था कि अमेरिकी बाज़ार के खो देने का अर्थ चीन जैसे देश की अर्थ व्यवस्था का समाप्त हो जाना था।
चीन के शुल्क विभाग के महानिदेशक ली क्यू वेन ने कहा है कि आर्थिक लेन- देन में वृद्धि ईरान और चीन के बीच आर्थिक सहकारिता में वृद्धि की सूचक है और चीन अमेरिका या हर दूसरे देश के आर्थिक एकाधिकार का विरोधी है और अमेरिकी कानूनों का चीन के लिए कोई महत्व नहीं है।"
जैसाकि ईरान के वित्तमंत्री फरहाद देजपसंद ने बल देकर कहा है कि ईरान और चीन के आर्थिक संबंधों में विस्तार के लिए कई कार्यक्रम हैं और व्यापार, पूंजी निवेश और तकनीक के क्षेत्र में इन संबंधों को विस्तृत करने के लिए प्रयास किया जाना चाहिये।