11 मार्च 2019 - 14:20
वाह रे दुनिया, पैग़म्बरे इस्लाम की क़ब्र चूमना हराम और सऊदी राजकुमार के कंधे चूमना जाएज़!!!

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता सैयद बदरुद्दीन अब्दुल मलिक अलहूसी ने रजब महीना शुरु होने के उपलक्ष्य में ईमानी पहचान के बदलने की संभावना के बारे में सचेत करते हुए धार्मिक मामलों में तकफ़ीरी विरोधाभासों की कड़े शब्दों में निंदा की।

अलमसीरा टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार सैयद बदरुद्दीन अलहूसी ने शनिवार की सुबह रजब महीने तथा हज़रत अली अलैहिस्सलाम के निमंत्रण पर यमनी नागरिकों के इस्लाम धर्म स्वीकार करने के उपलक्ष्य में अपने संबोधन में यमन की ईमानी और धार्मिक पहचान को मज़बूत बनाने पर बल दिया।

सैयद अलब्दुल मलिक अलहूसी ने कहा कि यमनियों की धार्मिक पहचान मिटाने और उनकी धार्मिक पथभ्रष्टता की चर्चा, तकफ़ीरी कट्टरपंथियों से जुड़ी है जो ईमान और धर्म अंतर्गत गतिविधियां अंजाम देते हैं किन्तु उसे दूसरी तरह पेश करते हैं।

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता ने कहा कि इस्लाम धर्म के आरंभ से ही यमनी नागरिकों के ईमान की पहचान की सबसे महत्वपूर्ण चीज़, अत्याचारी सरकारों के समक्ष उनका दृष्टिकोण, सत्य के समर्थन का उनका रूझान और उनका स्वतंत्रताप्रेम है।

उन्होंने यह बयान करते हुए कि पैग़म्बरे इस्लाम का सम्मान और उनसे प्रेम, समस्त इंसानों से प्रेम और सम्मान से ऊपर होने चाहिए। उन्होंने इस संबंध में तकफ़ीरियों के दृष्टिकोणों की आलोचना की।

श्री अब्दुल मलिक ने कहा कि उनकी शैलियां अलग अलग हैं, उनकी नज़र में पैग़म्बरे इसलाम का हर प्रकार का सम्मान अनेकेश्वरवाद है, यदि रसुल्लाह की क़ब्र को चूमें तो उनकी नज़र में आप अनेकेश्वरवादी हैं और यदि आप राजकुमार के कंधे को चूमते हैं तो यह वैध और जाएज़ है, बिदअत नहीं।

उन्होंने कहा कि बहुत से मामले उन्होंने धर्म में घुसा दिए जो उनकी नज़र में अनेकेश्वरवाद था, उन्होंने हराम और वर्जित चीज़ों को हलाल क़रार दे दिया, ख़ून बहान को हलाल कर दिया, दूसरों को मजबूर करते हैं, उनसे दुश्मनी करते हैं, महिलाओं और उनकी इज़्ज़त को तार तार करने को हलाल समझते हैं, वहाबियों की बहुत सी किताबों में ऐसी बहुत सी बातें मिल जाएंगी जो पैग़म्बरे इस्लाम के गुंबद को ध्वस्त करने पर बल देती हैं।

अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता ने यह बयान करते हुए कि पैग़म्बरे इस्लाम के कथनानुसार हज़रत अली से प्रेम ईमान की निशानी है, कहा कि तकफ़ीरी हज़रत अली अलैहिस्सलाम के बारे में बहुत ही नकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, हमारा राष्ट्र आरंभ से ही हज़रत अली से प्रेम करता है और उनके समर्थन और उनसे प्रेम की वजह से पहचाने जाते हैं।