19 अक्टूबर 2026 - 16:23
अमेरिका ईरान को हरा नहीं सकता, यूरोप की चुप्पी आश्चर्यजनक 

आखिर अमेरिका के इन कदमों के पीछे युद्ध का क्या औचित्य है। उनके अनुसार, किसी भी देश के खिलाफ युद्ध शुरू करने से पहले उसके कारणों और परिणामों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

ब्रसेल्स: अमेरिकी अर्थशास्त्री और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेफ्री सैक्स ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राईल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है। यूरोपीय संसद में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को सैन्य रूप से हरा नहीं सकता। उन्होंने इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

सैक्स के मुताबिक, उन्होंने यूरोपीय नेताओं को अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों की आलोचना करते नहीं सुना, जबकि क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों को लेकर यूरोप की ओर से आलोचना की गई। उन्होंने कहा कि यूरोप में स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ऐसे प्रमुख नेताओं में रहे हैं, जिन्होंने इस युद्ध के खिलाफ आवाज उठाई।

सैक्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के मामले में भी वैसा ही दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जैसा उसने वेनेजुएला के साथ किया था। उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और वहां के तेल राजस्व से जुड़े अमेरिकी रुख का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की सोच से ईरान के मामले को भी हल करने की कोशिश की गई।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अमेरिका के इन कदमों के पीछे युद्ध का क्या औचित्य है। उनके अनुसार, किसी भी देश के खिलाफ युद्ध शुरू करने से पहले उसके कारणों और परिणामों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

इस अर्थशास्त्री ने कहा कि रूस या चीन के साथ युद्ध करने का भी कोई उचित कारण नहीं है। उन्होंने गाजा में जारी हिंसा की भी आलोचना की और कहा कि वहां हो रहे घटनाक्रम को भी उचित नहीं ठहराया जा सकता।

सैक्स ने एशिया की बढ़ती आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि चीन, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य एशिया की बढ़ती भूमिका को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, वैश्विक अर्थव्यवस्था में इन क्षेत्रों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

सैक्स ने कहा कि दुनिया अब एक नए वैश्विक दौर में प्रवेश कर रही है, जहां अमेरिका के साथ चीन, रूस और भारत जैसी बड़ी शक्तियों की भूमिका भी अहम है। उन्होंने इन देशों के बीच प्रतिस्पर्धी गुट बनाने के बजाय सहयोग बढ़ाने की वकालत की।

उन्होंने चीन को लेकर अमेरिकी रणनीति पर भी सवाल उठाए। सैक्स के अनुसार, चीन को प्रशांत महासागर तक पहुंच सीमित करने की अमेरिकी नीति तनाव बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि चीन के साथ टकराव बढ़ाने के बजाय सामान्य संबंध बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।

सैक्स का मानना है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान सैन्य टकराव और गुटबंदी में नहीं, बल्कि प्रमुख शक्तियों के बीच सहयोग और कूटनीतिक बातचीत में तलाशा जाना चाहिए।

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