5 मार्च 2019 - 15:41
उत्तर से दक्षिण ट्रांज़िट कैरिडोर की सातंवी बैठक तेहरान में हो रही है

उत्तर से दक्षिण ट्रांज़िट कैरिडोर की सातंवी बैठक तेहरान में हो रही है और उसमें 14 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

ईरान के यातायात मंत्री मोहम्मद इस्लामी ने इस बैठक के उद्घाटन भाषण में कहा कि इस बैठक को उत्तर से दक्षिण कैरिडोर में महत्वपूर्ण बिन्दु व मोड़ समझा जा रहा है। यह बैठक दो दिवसीय है और विशेषज्ञ स्तर पर इस कैरिडोर की समीक्षा की जायेगी।

वर्ष 2000 में ईरान, भारत और रूस की इस कैरिडोर के सदस्य थे और बाद में आर्मीनिया, बुल्गारिया, ओमान, तुर्की, ताजिकिस्तान, क़ज़्ज़ाकिस्तान, किरकिज़िस्तान, यूक्रेन, बेलारुस, सीरिया और आज़रबाइजान गणराज्य इससे जुड़ गये और इस समय इसके 14 देश सदस्य हैं।

ईरान विश्व में इस कैरिडोर के चौराहे पर स्थित है। उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम, दक्षिण एशिया और ट्रासिका विश्व के चार महत्वपूर्ण कैरिडोर हैं और उनके कुछ भाग ईरान से होकर गुज़रते हैं।

उत्तर से दक्षिण कैरिडोर एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है और यह दोनों को आपस में जोड़ने की महत्वपूर्ण कड़ी है और जो पुराना रास्ता है उसकी अपेक्षा यह कैरिडोर चालिस प्रतिशत छोटा है और उस पर आने वाला ख़र्च भी 30 प्रतिशत कम व सस्ता है। इसी प्रकार यह कैरिडोर मध्य एशिया का एक महत्वपूर्ण ट्रांज़िट मार्ग है और जिन देशों से होकर यह कैरिडोर होकर गुज़रा है वे बंदरगाहों, रेलों और दूसरे मार्गों से इससे जुड़ने व लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं।

तेहरान में भारतीय राजदूत सौरभ कुमार इस कैरिडोर के महत्व की ओर संकेत करते हुए कहते हैं कि इस मार्ग से वस्तुओं को ले जाना और उसके असाधारण लाभ इस बात के कारण बने हैं कि भारत में इस कैरिडोर को पहचनवाने और उसके लाभ के बारे में विभिन्न बैठकें आयोजित की जायें।

तेहरान में उत्तर से दक्षिण ट्रांज़िट कैरिडोर की जो यह बैठक हो रही है उसका एक उद्देश्य इस बिन्दु पर बल देना है कि यह कैरिडोर केवल ट्रांज़िट के लिए नहीं है बल्कि इससे देशों के मध्य होने वाले व्यापार को भी बेहतर और विस्तृत किया जायेगा।

वर्ष 2018 में इस कैरिडोर के माध्यम से 11 करोड़ टन वस्तुओं को स्थानांतरित किया गया और कज़वीन-रश्त रेलवे मार्ग के पूरा हो जाने से इस संख्या व मात्रा में वृद्धि होगी।

बहरहाल इस्लामी गणतंत्र ईरान इस कैरिडोर में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सहकारिता करने हेतु तैयार है और इस संबंध में वह सुविधायें भी उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

इस कैरिडोर में ट्रांजिट विस्तार के अलावा पर्यटन भी एक विषय है जो समस्त सदस्य देशों की कार्यसूची में शामिल है और आशा है कि इस कैरिडोर के सदस्य देश अपने बीच अधिक से अधिक समन्वय करेंगे ताकि उत्तर से दक्षिण कैरिडोर से अधिक से अधिक लाभ उठाने की भूमि प्रशस्त हो सके।