सैनिक और प्रतिरोधक शक्ति से सम्पन्न होना किसी भी समझौते या कानून के खिलाफ नहीं है बल्कि समस्त देशों का कानूनी अधिकार है। मिसाइल क्षमता सहित दूसरे सैनिक संसाधन ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित बनाते हैं और मिसाइल क्षमता और उनमें विकास ईरान की स्ट्रैटेजी का एक भाग है। प्रतिरक्षामंत्री के बयानों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने ईरान के प्रक्षेपास्त्रिक कार्यक्रम को ख़तरा बताये जाने पर आधारित यूरोपीय देशों और अमेरिका के बयानों की आलोचना करते हुए बल देकर कहा कि यूरोप को चाहिये कि वह क्षेत्र में ईरान की उपस्थिति और ईरान की प्रतिरक्षा शक्ति जैसे मामलों में अमेरिका की हां में हां मिलाने से परहेज़ करे। क्योंकि हम यूरोप द्वारा अमेरिका की ज़ोर ज़बरदस्ती की हां में हां मिलाने को स्वीकार नहीं करेंगे।
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि प्रक्षेपास्त्रिक गतिविधियां ईरान का कानूनी अधिकार हैं और इसी कारण इस्लामी गणतंत्र ईरान ने बल देकर कहा है कि इस संबंध में वार्ता नहीं हो सकती और यह ईरान की रेड लाइन है।
ईरान की इस्लामी क्रांति संरक्षक बल सिपाहे पासदारान आईआरजीसी के उपकमांडर ने इस संबंध में कहा है कि अगर यूरोप या दूसरे, किसी षडयंत्र के अंतर्गत ईरान का मिसाइल कार्यक्रम से निरस्त्रीकरण करना चाहेंगे तो ईरान एक स्ट्रैटेजिक छलांग लगाने पर बाध्य हो जायेगा।
साथ ही आईआरजीसी के उपकमांडर ने बल देकर कहा कि ईरान की मिसाइल क्षमता क्षेत्र की सेवा के लिए है और उन्होंने पश्चिमी देशों को नसीहत की है कि वे प्रक्षेपास्त्रिक मामले में ईरान से कोई मांग न करें।
अपनी रक्षा के लिए प्रचलित हथियारों से सम्पन्न होना हर देश का कानूनी अधिकार है। इसी अधिकार के परिप्रेक्ष्य में ईरान देश के अंदर मौजूद विशेषज्ञों से लाभ उठाकर विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण प्रगति कर रहा है और अपनी ज़रूरत के हिसाब से रक्षा क्षमता में वृद्धि करता रहेगा।
जार्डन में ईरान के पूर्व राजदूत और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ अहमद दस्तमालचियान कहते हैं कि हर देश की रक्षा शक्ति उसी से विशेष होती है और दूसरे देशों को उसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है और ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिये।