15 जनवरी 2019 - 17:28
अमरीकी विदेशमंत्री का मध्यपूर्व का दौरा, ईरानोफ़िया को हवा देने की कोशिश

अमरीका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो का क्षेत्रीय दौरा समाप्त हो गया। उनका यह दौरा आठ जनवरी से शुरु हुआ जो अचानक ही ओमान के दौरे के बाद 14 जनवरी को समाप्त हो गया।

अमरीका के विदेशमंत्री को ओमान के बाद कुवैत का दौरा करना था किन्तु उन्होंने एक पारिवारिक शवयात्रा के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अपना यह दौरा रद्द कर दिया।

माइक पोम्पियो की यात्रा के कई लक्ष्य थे और इन सबसे बढ़कर उनकी यात्रा के दो मुख्य लक्ष्य थे। वाशिंग्टन की वर्तमान नीतियों के जारी रहने के बारे में अमरीका के क्षेत्रीय सहयोगियों को विश्वास में लेना और ईरान की क्षेत्रीय नीतियों और उसके प्रभाव को ख़तरे के रूप मे पेश करते हुए ईरानोफ़ोबिया की नीतियों को आगे बढ़ाना, उनकी यात्रा के मुख्य लक्ष्य थे। 

इसी के साथ माइक पोम्पियो ने अपनी यात्रा के दौरान क़तर के साथ सऊदी अरब और इमारात के बढ़ते मतभेद को ख़त्म करने का प्रयास किया किन्तु उनको इसमें सफलता हासिल नहीं हुई। 

मध्यपूर्व के बारे में वाशिंगटन की नीतियों पर क्षेत्रीय घटकों को विश्वास में लेने के बारे में माइको पोम्पियो ने विशेषकर सीरिया से अमरीकी सैनिकों के विषय की ओर संकेत करते हुए कहा कि क्षेत्र के बारे में अमरीका की नीतियों में कोई परिवर्तन नहीं आएगा। 

क्षेत्र में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति के जारी रहने पर माइक पोम्पियो की ताकीद से पता चलता है कि वाशिंग्टन के घटक किस सीमा तक इस बात को लेकर चिंतित हैं और पोम्पियो ने अवास्तविक वादों द्वारा इन देशों की ढारस बधाने का प्रयास किया। 

माइक पोम्पियो की क्षेत्रीय यात्रा का लक्ष्य जो उन्होंने जार्डन से शुरु की थी और सात क्षेत्रीय देशों की राजधानियों का दौरा किया, ईरान पर प्रतिबंध और उन कार्यवाहियों से मुक़ाबले के लिए वार्ता करना था जिसे वाईट हाऊस ईरान की अस्थिर करने वाली कार्यवाही कहता है।

बहरहाल अमरीका का यह लक्ष्य व्यवहारिक होना असंभव लगता है क्योंकि वााशिग्टन की नज़र में ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को कम करने का महत्वपूर्ण आयाम, सीरिया से ईरान और उसके घटक बलों का निकलना है। 

अमरीका जानता है कि वह ईरान के क्षेत्रीय प्रभावों का कभी भी मुक़ाबला नहीं कर सकता और वह कभी भी अपनी इस योजना में सफल नहीं होगा।