9 जनवरी 2019 - 17:12
क्या भ्रम को अमरीका ने अपनी विदेश नीति का आधार बना लिया है?

इस्लामी गणतंत्र ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि अमरीका ईरानोफ़ोबिया को अपनी विदेश नीति बनाने की कोशिश कर रहा है।

जवाद ज़रीफ़ ने कहा कि ईरान के बारे में अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन का भ्रम उन लोगों का भ्रम है जो बार बार पराजय का मुंह देखते हैं।

माइक पोम्पेयो ने मंगलवार को जार्डन में बयान दिया कि इलाक़े में बढ़ते ईरान के प्रभाव को रोकने की कोशिश की जाएगी।

अमरीका इस कोशिश में है कि ईरान के बारे में भ्रम फैलाकर तेहरान पर अकुंश लगाए। यह नीति ट्रम्प शासन काल तक सीमित नहीं है बल्कि यह सिलसिला उस समय से चल रहा है जब से ईरान में इस्लामी क्रान्ति सफल हुई है। इस्लामी क्रान्ति ने वास्तव में अमरीका के हाथ काट दिए। अमरीका को यह डर है कि ईरान के यही विचार कहीं उन देशों में भी न फैल जाएं जो अमरीका के पुराने घटक हैं। इस डर की वजय है कि ईरान की नीतियों को उन देशों की जनता भी पसंद करती है जहां की सरकारें इन नीतियों का विरोध करती हैं।

यही कारण है कि अमरीका ईरान पर अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता है हालांकि ईरान अस्थिरता नहीं बल्कि स्वाधीनता की विचारधारा फैला रहा है।

अमरीका बार बार यह दावा करता है कि ईरान इलाक़े के लिए ख़तरा है जबकि पूरे इलाक़े में जनता के स्तर पर यह राय है कि ईरान या ईरान की नीतियां इलाक़े के लिए हरगिज़ ख़तरा नहीं है अलबत्ता अमरीका के वर्चस्व के लिए इन नीतियों से ख़तरा है।

ईरान पूरे पश्चिमी एशिया के इलाक़े में यह कोशिश कर रहा है कि क्षेत्रीय देशों के साथ अच्छे संबंध हों और क्षेत्रीय देश सुरक्षा सहित सभी मुद्दों को अपने हाथ में लें, अमरीका जैसी बाहरी शक्तियों को इसमें हस्तक्षेप का मौक़ा न दें।

यदि वास्तव में देखा जाए तो अमरीका की नीतियां पश्चिमी एशिया ही नहीं हर उस इलाक़े के लिए ख़तरनाक हैं जहां अमरीका की उपस्थिति है और इस तथ्य को समझते हुए अब अनेक इलाक़ों में अमरीका के ख़िलाफ़ आवाज़ उठने लगी है। इस समय विश्व स्तर पर अमरीका जितना अलग थलग है उतना अलग थलग वह शायद पहले कभी नहीं रहा होगा।

अमरीका वैसे तो ईरान पर आरोप लगाता है और ईरान को अलग थलग करने की कोशिश कर रहा है लेकिन सच्चाई यह है कि अमरीका के आरोपों पर कोई भी विश्वास करने के लिए तैयार नहीं है जबकि ईरान को अलग थलग करने की कोशिश में अमरीका ख़ुद ही अलग थलग पड़ता जा रहा है।