रविवार को दसियों बौद्ध भिक्षुओं ने पश्चिमी म्यांमार के राख़ीन के सित्वे शहर में प्रदर्शन करके सरकार से मांग की कि वह बांग्लादेश में शरण लेने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को पुनः म्यांमार न आने दे। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि रोहिंग्याओं की म्यांमार वापसी और राख़ीन प्रांत के उत्तरी क्षेत्रों में उन्हें बसाए जाने से देश को कोई लाभ नहीं होगा। म्यांमार के चरमपंथी बौद्ध, रोहिंग्या मुसलमानों को इस देश का नागरिक नहीं मानते।
यह एेसी स्थिति में है कि जब बांग्लादेश में शरण लेने वाले हज़ारों रोहिंग्याओं ने शरणार्थियों के पहले गुट की म्यांमार वापसी से पहले 15 नवम्बर को प्रदर्शन करके कहा था कि वे नागरिकता के अधिकार के बिना म्यांमार नहीं लौटेंगे। ज्ञात रहे कि बांग्लादेश और म्यांमार के बीच होने वाले समझौते के आधार पर बांग्लादेश के काॅक्स बाज़ार क्षेत्र में शरण लेने वाले 2,260 रोहिंग्या मुसलमानों को नवम्बर महीने की समाप्ति से म्यांमार लौटना था लेकिन बांग्लादेश की सरकार ने सुरक्षा की अनुचित स्थिति के कारण इस प्रक्रिया को दस दिन पहले रोक दिया था।