21 नवंबर 2018 - 12:50
रासायनिक हथियारों के प्रयोग और निर्यात दोनों में पश्चिमी देश पहले नंबर पर हैं" सियामक बाक़ेरी

ईरान- इराक युद्ध की समाप्ति तक सद्दाम ने ईरान के विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों और युद्ध के मोर्चों पर 3500 हज़ार से अधिक बार रासायनिक बमबारी की थी

हॉलैंड के हेग नगर में रासायनिक हथियार अप्रसार संगठन की 23वीं बैठक 19 नवंबर से आरंभ हो गयी। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है और इसका गठन वर्ष 1997 में हुआ और 197 देश इस समय इसके सदस्य हैं।

इस संगठन की जब वार्षिक बैठक होती है तो ईरान-इराक युद्ध में सद्दाम द्वारा ईरान पर रासायनिक बमबारी से पीड़ित कुछ व्यक्ति भी इस संगठन की बैठक में भाग लेते हैं। ईरान- इराक आठ वर्षीय युद्ध के दौरान सद्दाम ने ईरान पर जो रासायनिक बमबारी की थी उसमें 60 हज़ार से अधिक लोग प्रभावित हुए।

जो लोग रासायनिक हथियारों का लक्ष्य बने उनमें कुछ एसे भी हैं जिनकी धीरे धीरे आंख की रोशनी जा रही है।

सद्दाम ने पहली बार रासायनिक बमबारी जनवरी 1981 में की थी। ईरान- इराक युद्ध की समाप्ति तक सद्दाम ने ईरान के विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों और युद्ध के मोर्चों पर 3500 से अधिक बार रासायनिक बमबारी की थी जिसमें बहुत अधिक संख्या में लोग हताहत व घायल हुए।

राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सियामक बाक़ेरी इस संबंध में कहते हैं जिस तरह से रासायनिक हथियारों का सबसे पहले प्रयोग पश्चिमी देशों ने किया था उसी तरह ये देश इन हथियारों का निर्यात करने में भी सबसे पहले हैं और इराक द्वारा ईरान पर थोपे गये युद्ध के दौरान इराक ने अपने रासायनिक हथियारों को जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन की 150 कंपनियों के माध्यम से तैयार किया था।

इस आधार पर रासायनिक हथियार अप्रसार संगठन की वार्षिक बैठक अतीत पर नज़र डालने का बेहतरीन अवसर है। इस बैठक के अवसर पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाती है जिसमें रासायनिक हथियारों से पीड़ित व्यक्तियों की तस्वीरें और दूसरी डाक्युमेन्ट्री फील्में व तस्वीरें दिखाई जाती हैं।

वर्ष 2015 में ओपीसीडब्ल्यू पुरस्कार से सम्मानित ब्रितानी प्रोफेसर अस्सेतरही कहते हैं" इस संगठन की बैठक में रासायनिक हथियारों से प्रभावित व्यक्तियों की उपस्थिति बहुत आश्चर्यजनक है और ईरानी कलाकारों ने सद्दाम द्वारा अपने देश पर रासायनिक बमबारी की घटनाओं को बहुत अच्छे ढ़ंग से पेश किया और दुनिया के लोग इस वास्तविकता से अवगत हो जायें कि इन रासायनिक हथियारों से लोगों को किन समस्याओं को सामना है।

शोचनीय बिन्दु यह है कि रासायनिक और सामूहिक हथियारों का प्रयोग और उनके भंडारण को अवैध करार दिया जा चुका है उसके बावजूद अमेरिका सहित कुछ देश अब भी जनेवा कंवेन्शन का उल्लंघन कर रहे हैं और अपने क्रिया- कलापों से जनेवा कंन्वेन्शन के लिए गम्भीर ख़तरा बने हुए हैं।

रासायनिक हथियारों की सबसे बड़ी भेंट चढ़ने वाले और परमाणु हथियारों के विरोधी इस्लामी गणतंत्र ईरान ने बारमबार बल देकर कहा है कि जब तक एक भी रासायनिक या परमाणु बम बाकी रहेगा तब तक इन हथियारों से पैदा होने वाला भय समाप्त नहीं होगा।