अमेरिका ने जब ईरान के खिलाफ ग़ैर कानूनी एवं एक पक्षीय प्रतिबंधों को थोप दिया है तो ऐसी स्थिति में यूरोपीय देश परमाणु समझौते को बाकी रखने और ईरान के साथ सहकारिता जारी रखने की जो बात कर रहे हैं वह ध्यान योग्य है परंतु अभी तक ब्रसल्ज़ की ओर से कोई ठोस व प्रभावी कार्यवाही दिखाई नहीं दे रही है।
ईरान के संसद सभापित डाक्टर अली लारीजानी ने सोमवार को जर्मनी के पूर्व विदेशमंत्री ज़िग्मार गैब्रियल से भेंट में कहा कि अमेरिकी कार्यवाहियों के मुकाबले में अगर यूरोप स्वतंत्र भूमिका निभा सका तो यूरोपीय देशों के हित में है।
ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध आरंभ होने से पहले यूरोपीय अधिकारी बारमबार विशेष मेक्निज़्म तैयार करने की बात करते थे और उन्होंने वादा किया था कि वे परमाणु समझौते की रक्षा के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों के मुकाबले में यूरोपीय कंपनियों का समर्थन करेंगे।
सवाल यह उठता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के मुकाबले में यूरोपीय संघ का मेकेनिज़्म कितना प्रभावी होगा?
रूस के एक वरिष्ठ विश्लेषक यूलिया सोशिन्कोवा कहते हैं" यूरोप ईरान को परमाणु समझौते से न निकलने के लिए आश्वस्त करना चाहता है क्योंकि ईरान ने धमकी दी है कि वह परमाणु समझौते से निकल सकता है।
इसी परिप्रेक्ष्य में यूरोप नया मेकेनिज़्म बनाने की बात कर रहा है और यह सकारात्मक कदम है परंतु अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह किस प्रकार काम करेगा और क्या वह प्रभावी होगा?
इसी प्रकार इस आर्थिक मामलों के रूसी विशेषज्ञ का मानना है कि इस बात की प्रबल संभावना है कि इस मामले पर यूरोप के छोटे और औसत दर्जे के व्यापारी ध्यान दें परंतु टोटल जैसी यूरोप की बड़ी कंपनी दुनिया के साथ सीमा से अधिक आर्थिक लेन- देन करती है और वह अमेरिकी प्रतिबंधों से प्रभावित होगी जबकि एक अन्य रूसी विशेषज्ञ आंद्रे बाक्लेत्सकी का मानना है कि ब्रसल्ज़ अमेरिका के साथ गम्भीर टकराव नहीं चाहता।
बहरहाल अमेरिका के प्रति यूरोप में मौजूद दृष्टिकोण इस बात के सूचक हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की एकपक्षीय कार्यवाहियों के प्रति विरोध गम्भीर है।
फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री डोमेनिक डिविल्पा ने अमेरिकी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा है कि अमेरिका मनमानी करने और उन संगठनों व संस्थाओं को समाप्त करने की चेष्टा में है जिनका गठन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुआ है और यूरोप के पूरब और पश्चिम के बीच दराड़ उत्पन्न करना अमेरिका का एक लक्ष्य है और अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते से एकपक्षीय व ग़ैर कानूनी रूप से निकल जाना और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन करके ईरान के खिलाफ प्रतिबंध विश्व समुदाय के दृष्टिकोण का अपमान है।
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि परमाणु समझौते के संबंध में अमेरिकी दावा निराधार है क्योंकि परमाणु ऊर्जा की अंतरराष्ट्रीय एजेन्सी के महानिदेशक ईरान की परमाणु गतिविधियों के शांतिपूर्ण होने की पुष्टि अपनी 13 बार की रिपोर्टों में कर चुके हैं। इस आधार पर यूरोप को चाहिये कि वह अपने हितों और प्रतिष्ठा के लिए ही जल्द से जल्द अपने वचनों पर अमल करे।