दक्षिणी यमन में इस गठबंधन ने जिन संगठनों और तत्वों को अपना घटक बनाया था अब उनका भी मोह भंग होने लगा है। दक्षिणी इलाक़े के एक नेता शैख़ अहमद मुसाइद हुसैन ने सऊदी अरब के हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि वह दक्षिणी प्रांतों को ध्वस्त कर देना चाहता है।
शबवा प्रांत में क़बीलों के सरदारों की बैठक में उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और उसके गठबंधन में शामिल देशों की ज़िम्मेदारी है कि उन्होंने यमन में जितना विध्वंस मचाया है उसकी भरपाई करें और प्रभावित क्षेत्रों के पुनरनिर्माण की ज़िम्मेदारी पूरी करें।
सऊदी अरब ने यमन पर हमले के समय एक गठबंधन बना लिया था। इस गठबंधन में सऊदी अरब ने सूडान और मलेशिया जैसे कुछ देशों को पैसे की लालच देकर शामिल किया था जबकि कुछ अन्य देशों पर उसने दबाव डालकर उन्हें इस गठबंधन का हिस्सा बनाया था। मलेशिया ने इस गठबंधन से बाहर निकलने की घोषणा कर दी है। क़तर एक साल पहले ही इस गठबंधन से बाहर हो गया है क्योंकि सऊदी अरब के साथ उसका बहुत गहरा विवाद शुरू हो गया है।
गठबंधन में शामिल इमारात ने यमन में अपना अलग एजेंडा लागू करना शुरू कर दिया और उसने कुछ भागों से सऊदी अरब द्वारा समर्थित गुटों को बेदख़ल कर दिया। इमारात ने अपने एजेंडे के तहत यमन के कुछ गुटों को अपने साथ मिलाया और अदन के इलाक़े तथा कुछ यमनी द्वीपों से सऊदी अरब द्वारा समर्थित संगठनों को पूरी तरह बाहर कर दिया।
इस पूरी प्रक्रिया का नतीजा यह निकला कि यमन तो युद्ध का आग में झुलस उठा और इस देश के मूल नागरिक प्रतिष्ठान ध्वस्त हो गए और दूसरी ओर सऊदी अरब के गठबंधन में शामिल देशों की नीतियों की वजह से धरातल पर अजीब विरोधाभासी स्थिति पैदा हो गई।
यमन में तो सऊदी गठबंधन को कोई सफलता नहीं मिली उलटे ख़ुद सऊदी अरब और इमारात की रक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई। यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों ने जवाबी हमले तेज़ किए और हमलों में मिसाइलों और ड्रोन विमानों का प्रयोग बढ़ा दिया तो सऊदी अरब के अमरीका से ख़रीदे गए पेट्रियट मिसाइल पूरी तरह नाकारा साबित हुए क्योंकि यमनी मिसाइल असीर, नजरान और जाज़ान जैसे दक्षिणी प्रांतों ही नहीं राजधानी रियाज़ तक पहुंचने लगे जबकि यह ड्रोन इमरात में दुबई एयरपोर्ट तक भी जा पहुंचे।
यह देश यमन के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद हमेशा बयान देते हैं कि उन्होंने हमले को नाकाम बना दिया है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में यह ख़बरें लगातार आ रही हैं सऊदी अरब और इमारात पश्चिमी देशों में एंटी ड्रोन सिस्टम ख़रीदने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं।
टीकाकार यह मानते हैं कि सऊदी अरब ने यमन युद्ध शुरू करके बहुत कुछ खो दिया जबकि उसे हासिल कुछ भी नहीं हुआ। वैसे 30 साल के अनुभवहीन सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान से इससे ज़्यादा की अपेक्षा भी नहीं थी।