प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी थिंक टैंक स्ट्राटफ़ोर ने अपनी एक रिपोर्ट के माध्यम से यह रहस्योद्घाटन किया है कि, जहां एक ओर ओमान की हमेशा से यह कोशिश रही है कि वह क्षेत्रीय और वैश्विक संकटों और घटनाक्रमों के प्रति निष्पक्ष रहे, संबंधों में संतुलन की अपनी नीति पर बाक़ी रहे और फ़ार्स की खाड़ी के देशों के बीच पेश आने वाले टकराव की स्थिति में वह किसी का साथ न दे, तो दूसरी ओर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ओमान पर दबाव डाल रहे हैं कि ओमान अपनी नीतियों में बदलाव लाए और ईरान से पूरी तरह अपने संबंधों को समाप्त कर दे।
अमेरिकी थिंक टैंक स्ट्राटफ़ोर ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया है कि रियाज़ और अबू-ज़हबी चाहते हैं कि ओमान भी उनकी नीतियों का पालन कर और इस संबंध में यह दोनों देश लगातार ओमान पर यह दबाव बना रहे हैं कि वह ईरान से अपने सभी व्यापारिक मामलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाए। स्ट्राटफ़ोर की रिपोर्ट के अनुसार रियाज़ और अबू-ज़हबी ओमान पर यह भी दबाव बना रहे हैं कि वह यमन तक पहुँच वाले सभी रास्तों को बंद कर दे और साथ ही क़तर की घेराबंदी करने वाले देशों के साथ खड़ा हो जाए।
उल्लेखनीय है कि ओमान पर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ऐसे स्थिति में दबाव बना रहे हैं जब यह दोनों आतिक्रमणकारी देश वर्ष 2015 से लगातार यमन की ग़रीब जनता पर पाश्विक हमला कर रहे हैं और हर दिन इस देश के मासूम बच्चों के ख़ून से होली खेल रहे हैं। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने सीरिया और इराक़ में जघन्य अपराध करने वाले तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश का समर्थन करके पूरे पश्चिमी एशिया के अधिकतर इलाक़ों को आतंकवाद की भेंट चढ़ा दिया है।