18 सितंबर 2017 - 12:47
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यमन की बैलैस्टिक मिसाइल के निशाने पर

अलहोसी ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों से कहा है कि सऊदी अरब के सभी तेल केन्द्र यमनी मिसाइल के निशाने पर हैं अगर यमन के खिलाफ अक्रामक्ता बंद न की गई तो सख्त कार्यवाई की जाएगी।अब्दुल मलिक ने आगे कहा कि यमनी ड्रोन विमान सऊदी अरब के भीतर घुस कर कार्यवाई करने में सक्षम हैं

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना :यमनी नेता अंसारुल्लाह आंदोलन के नेता ने कहा है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात यमन की बैलैस्टिक मिसाइल के निशाने पर हैं।
ज्ञात रहे कि अंसारुल्लाह नेता सैयद अब्दुल बदर दीन अलहोसी ने टीवी पर यमनी जनता को संबोधित करते हुए कहा है कि यमनी बैलिस्टिक मिसाइल बहुत आसानी से संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को चेतावनी दी है कि वे यमन की बेल्स्टिक मिसाइलों के लक्ष्य पर हैं। सईद अब्दुल मलिक अल हौसी ने विदेशी कंपनियों और निवेशकों को चेतावनी दी थी कि उन्हें संयुक्त अरब अमीरात को सुरक्षित देश नहीं समझना चाहिए। अलहोसी ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों से कहा है कि सऊदी अरब के सभी तेल केन्द्र यमनी मिसाइल के निशाने पर हैं अगर यमन के खिलाफ अक्रामकता बंद नहीं की गई तो सख्त कार्यवाई की जाएगी। अब्दुल मलिक ने आगे कहा कि यमनी ड्रोन विमान सऊदी अरब के भीतर घुस कर कार्यवाई करने में सक्षम हैं, और जल्द ही सऊदी अरब के सैनिक ठिकानें पर हमला करेगा। अंसारूल्लाह के नेता का कहना है कि यमनी ड्रोन विमान इससे पहले भी कई बार सऊदी अरब की सीमाओं के भीतर सैकड़ों किलोमीटर तक घुसपैठ कर चुके हैं अब सऊदी सीमा के अंदर नियमित रूप से बमबारी करेंगे। अलहौसी ने यमन के तट पर मौजूद सऊदी सहयोगी बलों को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अलहदीद के क़रीब आने की ग़लती न करें अन्यथा उन्हें यमनी सेना की कड़ी जवाबी कार्यवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सऊदी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तेल केन्द्रों को सुरक्षित रखना है तो अलहदीद के क़रीब आने की कोशिश भी न करें। यह स्पष्ट है कि मलिक के बयान के बाद सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारी परेशान हो गए हैं। यह माना जाता है कि यमन लंबे समय से अरब दुनिया में सबसे ग़रीब देश रहा है, जो हमेशा संघर्षों और युद्धों से पीड़ित है, लेकिन मार्च 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले युद्ध पूरी तरह से अपने लक्ष्यों को हासिल करने में विफल रहे।