18 अगस्त 2017 - 05:29
इराक़ी अहले सुन्नत प्रतिनिधि ने आयतुल्लाह सीस्तानी का आभार व्यक्त किया।

आयतुल्लाह सीस्तानी का हमारे लिए ऐतिहासिक जुमला है कि "यह न कहो! कि अहले सुन्नत भाई बल्कि कहो हमारी जानें " अगर दाइश के ख़िलाफ़ उनका फ़तवा न होता तो आज पूरे इराक़ पर दाइश का क़ब्ज़ा होता

अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी अबनाः इराक़ी संसद में नैनवा राज्य के अहले सुन्नत प्रतिनिधि अहमद मदलूल अलजरबा ने मूसिल की स्वतंत्रता हेतु इराक़ी शियों के त्याग एवं बलिदान की सराहना करते हुए इस संबंध में शियों का एवं विशेष रूप से आयतुल्लाह सीस्तानी का आभार व्यक्त किया एवं कहा कि इराक़ के शाँति प्रिय व्यक्तित्व को अगर मीडिया भुला भी दे तब भी शरीफ़ इंसानों की अंतर्रात्मा एवं दिल इसे भुला नहीं सकते। अलजरबा ने आगे कहा कि आयतुल्लाह सीस्तानी का हमारे लिए ऐतिहासिक जुमला है कि "यह न कहो! कि अहले सुन्नत भाई बल्कि कहो हमारी जानें " अगर दाइश के ख़िलाफ़ उनका फ़तवा न होता तो आज पूरे इराक़ पर दाइश का क़ब्ज़ा होता एवं उनका झंडा लहरा रहा होता। अहले सुन्नत के प्रतिनिधि ने दक्षिणी इराक़ की समस्त जनजाति एवं हश्दुश्शअबी का भी आभार व्यक्त किया एवं धन्यवाद कहा जिन्होंनें मूसिल की आज़ादी के लिये अपनी जान की बाज़ी लगा दी।