ईरान के ख़िलाफ़ ओबामा का अंतिम दुश्मनी भरा क़दम
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वाइट हाउस में अपनी मौजूदगी के अंतिम दिनों में इस देश की कॉन्ग्रेस के नाम ख़त में ईरान, क्यूबा, लीबिया, ज़िम्बाबवे, वेनेज़ोएला और यूक्रेन के संबंध में राष्ट्रीय आपात स्थिति की अवधि बढ़ा दी। यह ऐसी हालत में है कि ईरान जेसीपीओए को पूरी तरह लागू करने की कोशिश कर रहा है। अमरीकी राजनेता चाहे व डेमोक्रेट्स हों या रिपब्लिकन्स ईरान के लिए हालात सख़्त करने की कोशिश में लगे हैं। अमरीका की राष्ट्रीय आपात की स्थिति की अवधि का बढ़ना इसी दृष्टिकोण के तहत है।
अमरीकी सत्ताधारी ईरान में इस्लामी क्रान्ति के आरंभ से ही किसी न किसी बहाने ईरान को ख़तरा दर्शाने में लगे रहे। परमाणु विषय पर अमरीका ने निराधार दावे के ज़रिए ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को सुरक्षा के लिए ख़तरा दर्शाने की कोशिश की लेकिन इस प्रक्रिया को जेसीपीओए पर दस्तख़त से लगाम लग गयी हालांकि फिर भी अमरीका की नियत नहीं बदली बल्कि सिर्फ़ उसकी शैली बदली है।
अगर पिछले 50 साल के दौरान ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका के क्रियाकलापों पर नज़र डालें तो यह पाएंगे कि अमरीका हमेशा ईरान के लिए ख़तरा रहा है। इन सारे वर्षों में अमरीका ने चाहे वह क्रान्ति से पहले या क्रान्ति के बाद का समय रहा हो, ईरानी राष्ट्र से टकराने का रास्ता अपनाया और सिर्फ़ उस वक़्त परमाणु विषय पर बातचीत के लिए तय्यार हुया जब उसे ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदियों व धमकी देने की अपनी नीति नाकाम होती नज़र आयी। हालांकि अमरीका इस कोशिश में है कि पूरी तरह जेसीपीओए का उल्लंघन करे।
अमरीका के यह क्रियाकलाप ईरान के लिए ख़ास संदेश हैं। वह यह कि अमरीका की दुश्मनी विभिन्न रूप में यहां तक कि साफ़्ट वॉर के रूप में जारी है और ईरानी राष्ट्र के असल दुश्मन के रूप में अमरीका सभी रास्ते अपना रहा है।
15 जनवरी 2017 - 17:03
समाचार कोड: 805118
ईरान के ख़िलाफ़ ओबामा का अंतिम दुश्मनी भरा क़दम