उत्तरी अफ़्रीक़ा के देश ट्यूनीशिया में चार साल पहले आए इन्क़ेलाब के बाद पहली बार इस देश की जनता सीधे तौर पर अपने राष्ट्रपति को चुनने के लिए मतदान कर रही है। ट्यूनीशिया में इन्क़ेलाब ने लंबे समय से तानाशाही शासन कर रहे ज़ैनुल आबेदीन बिन अली की सत्ता को उखाड़ फेंका था।
रविवार को हो रहे चुनाव में, अपदस्थ तानाशाही शासन के वफ़ादारों, प्रतिबंधित पार्टियों के सदस्यों और 2011 की क्रान्ति से उभरने वाले नए राजनेताओं के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है।
ट्यूनीशिया में इस चुनाव को 1956 में फ़्रांस से मिली आज़ादी के बाद से पहला आज़ाद चुनाव कहा जा रहा है। रविवार का मतदान, आधुनिक इतिहास में सत्ता के पहले प्रजातांत्रिक हस्तान्तरण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
ट्यूनीशिया में राष्ट्रपति पद के चुनाव में 27 प्रत्याशी अपनी क़िस्मत आज़माने के लिए मैदान में हैं। इसलिए किसी प्रत्याशी के राष्ट्रपति बनने के लिए 50 प्रतिशत से ज़्यादा मत हासिल करना नामुमकिन लग रहा है। अगर किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से ज़्यादा वोट नहीं मिला तो सबसे ज़्यादा वोट पाने वाले दो प्रत्याशी दूसरे चरण में एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करेंगे।
23 नवंबर 2014 - 16:44
समाचार कोड: 653416
उत्तरी अफ़्रीक़ा के देश ट्यूनीशिया में चार साल पहले आए इन्क़ेलाब के बाद पहली बार इस देश की जनता सीधे तौर पर अपने राष्ट्रपति को चुनने के लिए मतदान कर रही है।