9 नवंबर 2014 - 19:36
 अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी को ईरान में हुए आतंकी हमले की पहले से ही थी जानकारी ।

अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए को वर्ष 2007 में ईरान में हुए आतंकी हमले की पहले से जानकारी हो गई थी।

अबनाः अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए को वर्ष 2007 में ईरान में हुए आतंकी हमले की पहले से जानकारी हो गई थी।
आतंकी संगठन जुन्दुल्लाह ने इस साल ईरान के अधिकारियों, आम नागरिकों महिलाओं और बच्चों को अपने आतंकी हमलों का निशाना बनाया था। वर्ष 2007 में दक्षिण पूर्वी ईरान में होने वाले बम धमाके में पासदाराने इंक़ेलाब फ़ोर्स के 11 जवान शहीद हुए थे और यह इस आतंकी संगठन का सबसे भयानक हमला था।
न्यूयार्क टाइम्ज़ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सीआईए के एक एजेंट को संस्था के भीतर मौजूद फ़ाइलों की जांच के दौरान ऐसी फ़ाइल भी मिली जिसमें इन हमलों की जानकारी हमलों के पहले से ही दर्ज थी। इस रिपोर्ट में ईरान के भीतर बड़ी घटना की सूचना दी गई थी।
समाचार पत्र ने बताया कि यह इंटेलीजेन्स रिपोर्ट न्यूयॉर्क से शुरू हुई तथा न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी की ख़ुफ़िया पुलिस के एक कर्मी थामस मैक हिल द्वारा तैयार की गई है जो एफ़बीआई की आतंकवाद निरोधक इकाई का सदस्य है। मैक हिल ने जुन्दुल्लाह के कमांडरों से संपर्क बनाने के लिए अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की यात्रा की। इस समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार उस समय जासूस सीआईए तथा एफ़बीआई के संयुक्त निरीक्षण में काम करते थे।
रिपोर्ट के अनुसार यह फ़ाइल जिस कर्मी को मिली, उसे इस मामले में गहरी रूचि हो गई अतः उसने संस्था के वकीलों से इस मामले में विचार विमर्श शुरू कर दिया। विचार विमर्श के बीच यह लोग इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आतंकी हमले से पहले इस बारे में जानकारियां एकत्रित करना ईरान के भीतर हमले के लिए अमरीका की सपोर्टिंग भूमिका के दायरे में आता है।
एफ़बीआई और फिर पेंटागोन ने जुन्दुल्लाह संगठन के भीतर मौजूद अपने जासूसों से जानकारियां प्राप्त करने का सिलसिला जारी रखा। जुन्दुल्लाह ने जब अपने हमलों में ईरानी नागरिकों को शहीद किया उसके बाद यहां तक कि अमरीकी विदेश मंत्रालय द्वारा इस संगठन को आतंकी संगठन घोषित कर दिए जाने के बाद भी अमरीकी अधिकारियों ने अपने जासूसों से संपर्क जारी रखा। हालांकि अमरीकी अधिकारी कई बार इस संगठन से अपने किसी भी प्रकार के संबंध का खंडन कर चुके हैं।
आतंकी संगठन के सरग़ना अब्दुल मालिक रेगी ने भी अपने इक़बालिया बयान में स्वीकार किया था कि अमरीकी अधिकारियों से उसका संपर्क था।