27 जुलाई 2013 - 19:18
असकर औलादी का बराक ओबामा के नाम पत्र।

बेहतर होगा कि आप ईरान के प्राचीन राजनीतिक और संस्कृतिक भूगोल को इस्लाम, इंक़ेलाब, देश की लीडरशिप और पब्लिक के संदर्भ में जान लें। इतिहास गवाह है कि इस देश का संदेश हमेशा शांति और दोस्ती रहा है और इसने हमेशा अपनी धार्मिक और राष्ट्रीय पहचान को सुरक्षित रखा है। इस देश का इतिहास सम्मानीय है। आप इस अवसर का फ़ायदा उठाये

''बेहतर होगा कि आप ईरान के प्राचीन राजनीतिक और संस्कृतिक भूगोल को इस्लाम, इंक़ेलाब, देश की लीडरशिप और पब्लिक के संदर्भ में जान लें। इतिहास गवाह है कि इस देश का संदेश हमेशा शांति और दोस्ती रहा है और इसने हमेशा अपनी धार्मिक और राष्ट्रीय पहचान को सुरक्षित रखा है। इस देश का इतिहास सम्मानीय है। आप इस अवसर का फ़ायदा उठाये''।
तसनीम समाचार एजेंसी को प्राप्त हुए बराक हुसैन ओबामा से कुछ बातें' के शीर्षक के तहत हबीबुल्लाह असकर औलादी के अमरीकी राष्ट्रपति के नाम खुले पत्र का टेक्स्ट इस प्रकार है:
'' इन दिनों देश के अंदर और बाहर हर वेबसाइट और हर ज़बान पर अमेरिका से बातचीत की बातें हैं यह खबर न तो पहली बार सामने आई है और न ही आख़री बार। अमेरिकियों ने कई बार ईरान से वार्ता की इच्छा जताई है लेकिन पिछले तीन दशकों में अमेरिकी अधिकारियों के साम्राज्यवादी रवय्ये और जबरन अग्रिम शर्तों के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका है।
मैं इस अवसर पर बराक हुसैन ओबामा साहब से नसीहत के तौर पर कुछ बातें कहना चाहता हूं।
1.    बराक हुसैन ओबामा साहब! आप अमेरिका के चौव्वालीसवें राष्ट्रपति हैं. दुनिया के राजनीतिक और प्राकृतिक नक्शे में दो दशक पहले एक राष्ट्र के रूप में उभरे अमेरिका में जाहिरी तौर पर आप पहले अश्वेत व्यक्ति हैं जिन्हें इस देश में राष्ट्रपति के रूप में चुना गया है। हालांकि अमेरिकी हुकूमतें पिछले आधी शताब्दी से ईरानी पब्लिक पर अत्याचार करती रहीं हैं लेकिन इसके बावजूद मुझे लगता है कि आप के बारे में ईरानी पब्लिक की भावनाएं आपसे पहले के राष्ट्रपतियों से अलग हैं। आप ने ईरान के साथ बिना शर्त बातचीत के वादे के साथ व्हाइट हाउस में कदम रखा था और चुनाव में जीतने के बाद अपने पहले नौरोज़ के संदेश में कहा था:
'' मैं ऐसी नीति चाहता हूँ जिसके तहत ईरान के साथ सभी मामलों का निपटारा और बेहतर संबंध स्थापित हो''। इसके बाद आप ने व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में स्पष्ट रूप में कहा था:
'' मुझे उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में धीरे धीरे प्रगति होगी''।
आपके उक्त सकारात्मक बयान सुनने के बाद उम्मीद हो गई थी कि ईरान के प्रति अमेरिका की दुश्मनी और ज़िद्दीपने में कमी आ जाएगी लेकिन अफसोस कि आप को राष्ट्रपति बने पांच साल बीत चुके हैं और इस दौरान धौंस दबाव, धमकी और प्रतिबंधों का सिलसिला न केवल कि कम नहीं हुआ बल्कि आए दिन उसमें वृद्धि होती चली आ रही है और इसके लिए विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आपने अपने पहले चार साल के दौरे के अंत में ईरानी राष्ट्र को संबोधित करके कठोर और धमकी भरे लहजे में कहा:
''हम ईरान पर इतिहास के सबसे सख्त प्रतिबंध लगाएंगे।
सवाल यह है कि एक अपने पैरों पर खड़े होने का इरादा रखने वाले राष्ट्र के खिलाफ इतनी सख्ती और कठोरता का आधार कौन सा तर्क है? इन सारी धमकियों और सख्तियों के पीछे कौन सा मानवता समर्थक तर्क निहित है? क्या आप दुनिया भर में मानवाधिकारों की ठेकेदारी का दावा नहीं करते? ऐसे में दुनिया के प्राकृतिक और राजनीतिक भूगोल में आपके देश से दस गुना ज़्यादा ऐतिहासिक बुनियादें रखने वाले देश से बैर रखने के लिए आपके पास क्या तर्क है?
2.    बेहतर होगा थोड़ा पीछे चलते हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका की हुकूमत ने 1330 हिजरी शम्सी (1951 ई0) में ईरान में सैन्य कूदता तख्ता पलट कर एक राष्ट्रीय सरकार का तख्ता पलट दिया था।
अमेरिकी सरकार ने मुहम्मद रज़ा पहलवी के शासनकाल में इस देश में सख़्त से सख़्त ज़ुल्म व अत्याचार का समर्थन किया। यहां तक कि 1356 और 1357 में अमेरिकी सरकार के विभिन्न तरह के समर्थन से शाही सरकार ने दुनिया वालों की नज़रों के सामने दिन के उजाले में देश की सड़कों पर हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
ईरानी राष्ट्र ने इस्लामी क्रांति लाकर एक लोकतांत्रिक सरकार का गठन किया लेकिन अमेरिकी नेता शुरू से ही अपने एजेंट तत्वों द्वारा तख़्तापलट, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप, गृहयुद्ध और अलगाववाद को बढ़ावा देते रहे। यहां तक कि इराक द्वारा ईरान पर जंग थोप दी गई। अल्जीरिया अनुबंध के तहत तय पाया था कि दोनों देश आपसी संबंध सामान्य करने की कोशिश करेंगे लेकिन ऐसा व्यवहारिक नहीं हो सका।
ओबामा साहब! क्या आपने कभी सोचा है कि इन दो संयुक्त और दो सरकारों में संबंध सामान्य क्यों नहीं हो रहे हैं?
दो हिस्सों में इसकी वजह बयान करना चाहता हूँ:
ए. ईरान से सम्बंधितजानकारी प्राप्त करने के आपके स्रोत इंक़ेलाब विरोधी और कपटी तत्व हैं। यह वह लोग हैं जिनके हाथ हजारों निर्दोष ईरानियों के ख़ून से रंगीन हैं, इसलिए यह कभी भी ईरान के अतीत, वर्तमान और भविष्य की सच्चाईयों के बारे में पता नहीं चलने देंगे।
ख. ज़ायोनी शासन एक अवैध सरकार के रूप में ईरान और अमेरिका के बीच संबंध स्थापित होते नहीं देख सकती और इस सिलसिले में हमेशा रूकावट डालती है।
गिरी सेक साहब के हालिया बयान पर निगाह भी बेहतर साबित होगी जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि ''नियतेन याहू बीस साल से ईरान के बारे में अमेरिका से झूठ बोल रहा है और व्हाइट हाउस के नेताओं को धोखा में रख रहा है।''
3. बराक हुसैन ओबामा साहब! यदि आप वास्तव में ईरान से संपर्क बहाली और बातचीत के इच्छुक हैं तो अपनी सूचना के सूत्रों की सेहत की समीक्षा कर लीजिए। आज का ईरान, आठ वर्षीय युद्ध, पैंतीस वर्षीय क्रांति विरोधी साजिशों और हालिया साफ़्टवार से सफलतापूर्वक गुज़र कर एक शक्तिशाली, दृढ़, प्रतिबद्ध, संरक्षित और संगठित देश बन गया और हर मैदान का हीरो है। धमकियों और प्रतिबंधों से न केवल यह कि राष्ट्र के इरादे पर कोई असर नहीं पड़ा है बल्कि लोग अपने इसी रास्ते पर डटे रहने के लिए और अधिक प्रतिबद्ध हो चुके हैं।
3.    ईरानी राष्ट्र से बैर के लिए अमेरिका के पास वर्तमान बहाना इस देश का शांतिपूर्ण एटमिक एनेर्जी का इस्तेमाल है और उसे परमाणु बम बनाने का प्रोग्राम कहा जा रहा है। इससे पहले अमेरिकी नेताओं से जो भी ईरान के खिलाफ बन पड़ा है करते रहे हैं। इस्लामी क्रांति की सफलता की शुरुआत में जब परमाणु तकनीक का कहीं अता पता नहीं था ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया जाता रहा है, कहीं सॉफ्टवार द्वारा, कहीं सशस्त्र संगठन बना कर और फिर इराक द्वारा युद्ध थोप कर, इन सारी कार्यवाहियों के पीछे कौन से कारण निहित थे?
अमेरिका सहित सभी पश्चिमी सरकारें ईरानी राष्ट्र को घुटने टेकने पर मजबूर करने के लिए सद्दाम का पूरा समर्थन करती रहीं। लेकिन अल्लाह की इच्छा से ऐसा हुआ कि ईरानी राष्ट्र के दुश्मन अपमानित हुए और अब क्षेत्र में उनका नाम व निशान तक नहीं है।
यह भी अल्लाह द्वारा इबरत का स्थान है कि सद्दाम हमारे प्रयासों से नहीं बल्कि उन्हीं लोगों के हाथों जिन्होंने इस भेड़िये को ईरानी राष्ट्र के खिलाफ दौड़ाया था पराजित कराया। अगर पूरी दुनिया खासकर अमेरिका के छलकपट के विशेषज्ञ इकट्ठा होकर इस अल्लाह के निर्धारित भाग्य और ईरानी राष्ट्र की जीत पर पर्दा डाल उसकी अनदेखी करना चाहें तो यह उनके वश में नहीं है।
आप अच्छी तरह से जानते हैं कि ईरान दुनिया से परमाणु हथियारों के उन्मूलन का अलमबरदार रहा है, आज भी है और इंशा अल्लाह आगे भी रहेगा। आपके इल्म में है कि ईरान अमेरिका या इस्राइल के डर से नहीं बल्कि अपने धर्म और अक़ीदे के आधार पर परमाणु बम तैयार करने को हराम समझता है और इस अध्याय में इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर के स्पष्ट फ़तवे के बाद किसी शक की गुंजाइश नहीं रह जाती। आप अच्छी तरह जानते हैं कि दुनिया की दो तिहाई पब्लिक ने अपनी निरपेक्ष या ओ, आई , सी के सदस्य सरकारों के माध्यम से कई बार ईरान और हमारे महान राष्ट्र के समर्थन की घोषणा की है कि ईरान परमाणु हथियार की तलाश में नहीं है। ऐसे में एक झूठ और भोंडे आरोप को बार बार क्यों दोहरा रहे हैं? अपने कूटनीतिक प्रयासों के आधार ग़लत बयानी और धोखे धड़ी पर क्यों रख रहे हैं?
क्या आप यह सोच रहे हैं कि झूठ, छल और धोखे के माहौल में वार्ता हो जाएगी?
हमारा यह मानना है कि इसका नतीजा सिवाय हमारे विश्वास कम होने और आपके झूठ के कुछ नहीं होगा। इसलिए कोई भी इंसानी तर्क इस प्रकार की बातचीत की ताईद नहीं कर सकती।
6. एक इंसानी तर्क के आधार पर वार्ता की शर्तें इमाम खुमैनी के दौर में भी बयान कर दी गई थीं और मौजूदा सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई के दौर में भी कई बार बयान की जा चुकी हैं:
ए. ईरानी पब्लिक से बैर और दुश्मनी का सिलसिला बंद हो।
ख. शाह के दौर में अमेरिका में ज़ब्त हुई ईरानी संपत्ति की वापसी जो कि बहुत बड़ी राशि बन चुकी है।
ग. ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब और पब्लिक द्वारा बनने वाली सरकार को स्वीकार करना और देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का सिलसिला बंद करना।
घ. रोज रोज की धमकी और ग़ैर क़ानूनी प्रतिबंधों के सिलसिले को ख़त्म करना जो दवाओं तक पर भी लगाए गये हैं।
म. इस्लाम और मुसलमानों से दुश्मनी का सिलसिला खत्म करते हुए अमेरिका के रक्षा मंत्रालय, सी, आई, ए, और विदेश मंत्रालय की मेज पर से क्रूसेड का प्रोजेक्ट हटना।
मेरा मानना है कि यदि आप इस्राइल के दबाव और तर्क से खाली चरमपंथ (अमेरिकी राजनीतिक) पार्टियों की धौंस पर ध्यान न लाकर अमेरिकी और ईरानी दोनों राष्ट्रों के वर्तमान और भविष्य के हितों को मद्देनजर रखें और उक्त मामलों में से किसी एक ही को व्यवहारिक रूप दे दें तो सच्चाई पर आधारित द्विपक्षीय वार्ता की संभावनाएं रौशन हो जाएगी जिनमें द्विपक्षीय सम्मान भी बाकी रहेगा।
मैं शुभचिंतक हूं और ईमानदारी से कह रहा हूं कि पिछले पैंतीस साल से ईरानी राष्ट्र से दुश्मनी जिसमें हर दिन वृद्धि होती रही है आपकी हुकूमत, दोनों राष्ट्रों के हितों और विश्व शांति के लिए बेहतर नहीं है। यह इसलिए नहीं कह रहा कि हम इस समय क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली देश और दुनिया के प्रभावशाली राष्ट्र बन चुके हैं, नहीं बल्कि यह इसलिए कह रहा हूं कि इस लड़ाई में अल्लाह हमारे देश की मदद करता है और आप अल्लाह की मदद से वंचित हैं और इसी वजह से हमारी क़ौम हमेशा सफल है।
आख़री बात यह कि बेहतर होगा कि आप ईरान के प्राचीन राजनीतिक और संस्कृतिक भूगोल को इस्लाम, इंक़ेलाब, देश की लीडरशिप और पब्लिक के संदर्भ में जान लें। इतिहास गवाह है कि इस देश का संदेश हमेशा शांति और दोस्ती रहा है और इसने हमेशा अपनी धार्मिक और राष्ट्रीय पहचान को सुरक्षित रखा है। इस देश का इतिहास सम्मानीय है। आप इस अवसर का फ़ायदा उठाये''।
ईरान ने बहुत शांति और सुकून के साथ ग्यारहवें राष्ट्रपति चुनाव का सफल आयोजन करवाया है जिसमें बड़े पैमाने पर पब्लिक ने पूरी आज़ादी के साथ हिस्सा लिया है। वास्तव में आइए इस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुए 'अवसर' से फायदा उठाइये और उसे 'चुनौती' न बनने दीजिए।
मेरे विचार में आप जानते हैं कि ईरान और अमेरिका की पब्लिक खासकर दोनों देशों के चुनिंदा लोगों के बीच एक दूसरे के प्रति सम्मान पाया जाता है और आपस में ऐसा कोई विवाद नहीं है कि आपकी और ज्यादा पहचान और जानकारी में बाधा हो। अच्छा है कि अपने पद के शेष समय से लाभ उठाएं।
ओबामा साहब आप का स्थान और हैसियत यह है कि आप इतिहास से सीख लेते हुए देशों और उनकी मांगों का सम्मान करें। वैश्विक परिस्थितियों की कुछ ख़ास मांगें हैं। सोवियत संघ टूटने में देर नहीं लगी और इमाम खुमैनी ने परोक्ष रूप से पश्चिम को भी यह चेतावनी दे दी थी कि सावधान रहें कि कहीं उनका हाल भी सोवियत संघ का जैसा न हो।
ओबामा साहब! आपने पहले राष्ट्रपति चुनाव के मौके पर अपने अभियान के दौरान बदलाव 'का वादा किया लेकिन आप को राष्ट्रपति पद पर नियुक्त हुए कुछ साल बीत गए हैं और अभी तक कोई' परिवर्तन 'नज़र नहीं आया। आप संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में एक नया मोड़ ला सकते हैं ताकि इसका नतीजा 'पवित्र जीवन' के रूप में सामने आये। यह अर्थ हम क़ुरआन करीम में अल्लाह के संदेश से निकाल के आपके सामने पेश कर रहे हैं ताकि सभी अच्छी सोच वाले इंसानों के सहयोग से आप मानवता की शांति और सुकून की फिक्र कर सकें। यह संदेश अल्लाह तआला की इबादत व उपासना की एक निशानी ह।
दुनिया भर के इंसानों की सौभाग्य की उम्मीद के साथ
वस्सलाम''