इससे पहले वाले हिस्से में हमने बताया कि इंसानी कल्चर में इस्लामी सिवीलाईज़ेशन व कल्चर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पूरे इतिहास में विदेशियों ने इस्लामी सिवीलाईज़ेशन की महान व बड़ी-बड़ी उपलब्धियों की अनदेखी करके मुसलमान उल्मा व वैज्ञानिकों की कुछ खोजों को अपनी खोज बताने की कोशिश की है। हमने पहले वाले हिस्से में कुछ उन बातों की तरफ़ इशारा किया था जिनका इस्लामी सिवीलाईज़ेशन के बनने में रोल रहा है। हमने बताया था कि विभिन्न कल्चरों और जातियों के लोगों ने इलाही दीन इस्लाम स्वीकार किया और इस दीन ने हर तरह के भेदभाव और अंध विश्वास से दूर रहकर लोगों के लोक-परलोक के मामलों को समन्वित करने के लिए महान सिवीलाईज़ेशन की नींव रखी। आज के इस हिस्से में हम कुछ उन दूसरे तत्वों के बारे में बात करेंगे जिनकी इस्लामी सिवीलाईज़ेशन व कल्चर के उतार- चढ़ाव में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।इस्लामी सिवीलाईज़ेशन की एक महत्वपूर्ण विशेषता व कसौटी, अख़लाक़ व रूहानियत अर्थात नैतिकता और अध्यात्म है। लेबनान के ईसाई राइटर जॉर्ज जुर्जी ज़ैदान लिखते हैं" मदीने में दाख़िल होने के बाद पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. का सबसे पहला और अहेम क़दम, यह था कि उन्होंने मक्के और मदीने के मुसलमानों के बीच भाईचारे व दोस्ती का समझौता कराया। मक्के से मदीने पलायन करने वाले मुसलमानों और पहले से मदीने में रहने वाले मुसलमानों के बीच भाईचारे का समझौता कराना एकता की दिशा में इस्लाम का पहला क़दम था जिसे पैग़म्बरे इस्लाम स.अ. के आदेश व सुझाव पर किया गया। जुर्जी ज़ैदान के अनुसार उसी समय से मुसलमानों ने नैतिकता और आध्यात्म पर ज़ोर देकर इस्लाम के क़ानूनों को मान्यता और महत्व दिया और नैतिकता व अध्यात्म पर इस्लामी सिवीलाईज़ेशन की बुनियाद रखी।दीन और नैतिकता का कल्चर और सिवीलाईज़ेशन से संबंध है और यह कल्चर व सिवीलाईज़ेशन के विकास में असर रखते हैं। मौजूदा समय के अधिकांश विचारक इस बात पर एकमत हैं कि पश्चिमी सिवीलाईज़ेशन हालांकि साइंस और इंड्रस्टी की निगाह से बहुत ऊपर है लेकिन इस सिवीलाईज़ेशन में नैतिकता का न केवल यह कि उस सीमा तक विकास नहीं हुआ है बल्कि वह पतन के रास्ते पर अग्रसर है। आज बहुत से विचारकों का यक़ीन है कि पश्चिमी सिवीलाईज़ेशन नैतिकता और आध्यात्म पर ध्यान न देने के कारण पतन की तरफ़ जा रही है।अमेरिकी राइटर Buchanan j. Patrick अपनी किताब west death में इस बात को लिखते हैं कि क्यों वह समाज बहका हुआ और मौत के कगार पर है, जो साइंस की निगाह से तरक़्क़ी के रास्ते पर अग्रसर है?एक्सपर्ट्स ने पश्चिमी सिवीलाईज़ेशन के पतन के सिलसिले में विभिन्न दृष्टिकोण पेश किये हैं। रिनैंसा के बाद पश्चिम में फैली विचारधारा तीन स्तंभों पर आधारित थी। पहला आदमी, दूसरे उदारवाद और तीसरे सेकुलरिज़्म। पहली धारणा के अनुसार आदमी एक आज़ाद व स्वाधीन प्राणी है, परलोक से उसका कोई संबंध नहीं है और उसे इलाही हिदायत की कोई ज़रूरत नहीं है। इसके अतिरिक्त पश्चिमी कल्चर व सिवीलाईज़ेशन लिब्रालिज़्म पर यक़ीन और केवल निजी हितों के महत्व के मद्दे नज़र नैतिक और आध्यात्मिक सिद्धांतों का इंकार करती है। इस बात में शक नहीं है कि इन सिद्धांतों का इंकार, पश्चिमी समाज में किसी तरह की रोक- टोक न होने का नतीजा है। पश्चिमी सिवीलाईज़ेशन की एक विशेषता व आधार सेकुलरिज़्म या भौतिकवाद और इसके नतीजे में क़ानून और सामाजिक प्रोग्राम बनाने के मैदानों में दीन का इंकार किया जाता है। आज पश्चिमी सिवीलाईज़ेशन पर लिब्रालिज़्म, भौतिकवाद और आदमी को मूल तत्व के रूप में मानने वाली विचार धारा का बोलबाला है जो आदमी की ज़िंदगी के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर रही है। अमेरिकी राइटर Buchanan इस सवाल के जवाब में कि क्यों वह कल्चर असहनीय हो गया है जिसका पश्चिम दम भरता है? कहते हैं" यह सिवीलाईज़ेशन नैतिकता और आध्यात्म से टकराव रखने और पारम्परिक व मज़हबी हस्तियों के साथ इस कल्चर के क्रिया- कलापों के कारण नफ़रत का पात्र बन गयी है। वास्तव में पश्चिमी सिवीलाईज़ेशन पर जिस सोच का बोलबाला है वह इलाही और इंसानी फ़ितरत से टकराव रखती है।अमेरिकी राइटर Buchanan नैतिकता की अनदेखी और पश्चिमी आदमी की ज़िंदगी से दीन की समाप्ति को पश्चिमी सिवीलाईज़ेशन के पतन का एक कारक मानते हैं। वह अपनी किताब में लिखते हैं" सन १९८३ में जब वाइट हाउस में चिकित्सा संकट के संबंध में चर्चा हो रही थी, एड्स की बीमारी के कारण ६०० अमेरिकियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। समलैंग्गिकों ने क़ुदरत से जंग का ऐलान कर दिया था और क़ुदरत ने भी बुरी तरह उन्हें सज़ा दी। मौजूदा समय में संक्रामक विषाणु एचआईवी से ग्रस्त लाखों लोग प्रतिदिन मिश्रित औषधि COCKTAIL के सेवन से ज़िंदा हैं। यौन चलन या बिना रोक- टोक यौन संबध भी इंसानी पीढ़ी को बर्बाद कर देने के लिए शुरू हो चुका है। गर्भपात, तलाक़, जन्म दर में कमी, जवानों द्वारा आत्म हत्या, मादक पदार्थों का सेवन, औरतों और बड़ी उम्र के लोगों के साथ दुर्व्यहार, बिना रोक टोक यौन संबंध और इस तरह के दूसरे दसियों विषय सबके सब इस बात की निशानी हैं कि पश्चिमी सिवीलाईज़ेशन पतन की तरफ़ बढ़ रही है" अमेरिकी राइटर Buchanan पश्चिमी समाज के प्रभाव को हीरोइन की तरह मानते हैं जो शुरू में इंसान को आराम देता है लेकिन जिस्म में मिल जाने के बाद आदमी को बर्बाद कर देता है। एक और अमेरिकी राइटर KENNETH MINOG अपनी किताब नई कसौटी में लिखते हैं" नैतिकता से इतनी ज़्यादा दूरी के कारण हम यह दावा नहीं कर सकते कि यूरोपीय और पश्चिमी सिवीलाईज़ेशन बेहतर है"।सैद्धांतिक रूप से उस समाज के बाक़ी व विकसित रहने की गारंटी है जिस समाज अथवा सामाजिक परिवेश में नैतिकता में विकास हो और लोग आध्यात्मिक और नैतिक सिद्धांतों का सम्मान करें। " इस्लामी और ईरानी कल्चर व सिवीलाईज़ेशन की विकसितता" नामक मूल्यवान किताब के राइटर डाक्टर अली अकबर विलायती लिखते हैं" अगर कोई समाज मान्य व स्वीकार्य सीमा तक सिवीलाईज़ेशन में विकास कर चुका हो लेकिन वह क़ानून का सम्मान न करे तो यह सिवीलाईज़ेशन कमज़ोर हो जाएगा और अंततः असुरक्षा व अराजकता समाज के स्तंभों को हिला देंगी तथा उस सिवीलाईज़ेशन की तरक़्क़ी रुक जायेगी। क्योंकि उद्देश्यहीन सिवीलाईज़ेशन निरंकुशता का कारण बनेगा। इसीलिए इस्लामी सिवीलाईज़ेशन का आधार नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों, एकता, और निजी तथा सामाजिक क़ानूनों पर रखा गया है।सिवीलाईज़ेशन सहित समाज और आदमी से सम्बंधित विषयों में उतार- चढ़ाव आते हैं। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि हर सिवीलाईज़ेशन अपनी लम्बी ज़िंदगी में कुछ चरणों से गुज़रती है जिसके दौरान वह कभी विकास करती है तो कभी पतन की तरफ़ जाती है। जैसा कि हमने बताया कि नैतिकता व आध्यात्मिकता का होना कल्चर व सिवीलाईज़ेशन के विकास का कारण बन सकता है। इसके विपरीत अगर कोई समाज सभ्य हो लेकिन वह नैतिक और मज़हबी आधारों की अनदेखी कर दे तो दीर्घावधि में उसे अपूर्णीय नुक़सान का सामना होगा। इस बात का एक स्पष्ट प्रमाण एन्डालुशिया andalusia में मुसलमानों का कड़ुवा नतीजा है। बहुत से एक्सपर्ट इस्लामी और नैतिक मूल्यों की उपेक्षा को andalusia में मुसलमानों के पतन का कारण मानते हैं। यह ऐसी स्थिति में है कि इलाही दीन इस्लाम नैतिक व आध्यात्मिक गुणों को निखारने और उनकी सुरक्षा पर बहुत ज़ोर देता है। इस्लामी इतिहास में आया है कि पैग़म्बरे इस्लाम का मक्का से मदीना पलायन का एक कारण यह था कि मुसलमान मक्के में प्रचलित जेहालत के कल्चर से दूर हो जायें और नैतिक गुणों को निखारने के लिये अपने आपको
11 जुलाई 2013 - 19:30
समाचार कोड: 439951
इससे पहले वाले हिस्से में हमने बताया कि इंसानी कल्चर में इस्लामी सिवीलाईज़ेशन व कल्चर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पूरे इतिहास में विदेशियों ने इस्लामी सिवीलाईज़ेशन की महान व बड़ी-बड़ी उपलब्धियों की अनदेखी करके मुसलमान उल्मा व वैज्ञानिकों की कुछ खोजों को अपनी खोज बताने की कोशिश की है।