दमिश्क, अल-आलम टीवी की रिपोर्ट के अनुसार सीरिया एक फ़ौजी मामलों के विशेषज्ञ सलीम हरबा ने महत्वपूर्ण स्ट्रॉटेजिक शहर अलक़सीर में विद्रोहियों की हार को सीरिया सरकार के विरोधियों और उनके समर्थकों पर कारा वार बताया और कहा कि इससे आतंकवादियों को बड़े पैमाने पर राजनीतिक और फ़ौजी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
सलीम हरबा इतवार को अल-आलम समाचार चैनल से बातचीत कर रहे थे, उन्होंने कहा:
''स्ट्रॉटेजिक निगाह से हम्स राज्य का अलक़सीर शहर बहुत महत्वपूर्ण है और दमिश्क, हमाह और अल-वुसता इलाक़ों में सक्रिय सशस्त्र आतंकवादियों का अस्लहाखाना और लेजिस्टिक सहायता का गढ़ रहा है।''
उन्होंने कहा:
''अलक़सीर में मारे जाने वाले ज्यादातर आतंकवादी जिब्हतुन नस्रह और अल-क़ायदा से जुड़े थे और सीरियाई सेना ने महत्वपूर्ण राजनीतिक और फ़ौजी रणनीति अपना कर उनके खिलाफ़ बड़ा आपरेशन किया है कि परिणाम बख्श साबित हुआ है यह सब बड़ा असर यह होगा कि इससे हम्स के कुछ क्षेत्रों के बचे खुचे आतंकवादी भी हथियार डाल देंगे।''
''सीरिया में आतंकवादियों को इस ऑपरेशन से भारी नुकसान पहुंचा है, इसका मतलब यह है कि सीरियाई सेना ने अपनी रणनीति द्वारा आतंकवादियों का पूरा नेटवर्क ध्वस्त कर दिया है '।
उन्होंने जोर देकर कहा:
'' इन हालात में बहुत जल्द ही कई अन्य स्थानों पर ऑपरेशन के अवसर मिलेंगे, सीरिया सेना ने आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने पर कमर कस ली है और दूसरी ओर आतंकवादियों में मतभेद और फूट पड़ चुकी है, जिसका सीरिया संकट के सभी राजनीतिक पहलुओं पर असर पड़ेगा।''
हरबा के अनुसार इस ऑपरेशन से पहले भी सेना की कामयाबियों ने सीरिया में विरोधियों को कमजोर किया था लेकिन हालिया दिनों और हफ्तों की कई उपलब्धियों ने विरोधियों को इतना कमजोर कर दिया है कि वह इस बात के लिए तैयार हो गए हैं कि विवाद का राजनीतिक समाधान निकाला जाए। आतंकवादियों की लगातार नाकामियों ने अमेरिकी अधिकारियों को भी अपने पक्ष से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है और अब उनके लिए (अपनी बात थोपने की) कोई गुंजाइश नहीं बची है।
उन्होंने स्पष्ट किया:
''अलक़सीर में सेना के ऑपरेशन और उपलब्धियों ने साबित कर दिया है कि सीरिया सरकार के पास आतंकवाद से निपटने के लिए नित नई रणनीतियाँ हैं और देश राजनीतिक रूप से हुकूमत की इच्छा से आगे बढ़ रहा है।''
हरबा ने अंत में कहा:
''जिनेवा में होने वाली दूसरी कॉन्फ़्रेंस, सीरिया को आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई से नहीं रोक पाएगी. विद्रोह दिवालियापन का शिकार है और अब लड़ाई और आतंकवाद को छोड़ना चाहती है।''
सलीम हरबा इतवार को अल-आलम समाचार चैनल से बातचीत कर रहे थे, उन्होंने कहा:
''स्ट्रॉटेजिक निगाह से हम्स राज्य का अलक़सीर शहर बहुत महत्वपूर्ण है और दमिश्क, हमाह और अल-वुसता इलाक़ों में सक्रिय सशस्त्र आतंकवादियों का अस्लहाखाना और लेजिस्टिक सहायता का गढ़ रहा है।''
उन्होंने कहा:
''अलक़सीर में मारे जाने वाले ज्यादातर आतंकवादी जिब्हतुन नस्रह और अल-क़ायदा से जुड़े थे और सीरियाई सेना ने महत्वपूर्ण राजनीतिक और फ़ौजी रणनीति अपना कर उनके खिलाफ़ बड़ा आपरेशन किया है कि परिणाम बख्श साबित हुआ है यह सब बड़ा असर यह होगा कि इससे हम्स के कुछ क्षेत्रों के बचे खुचे आतंकवादी भी हथियार डाल देंगे।''
''सीरिया में आतंकवादियों को इस ऑपरेशन से भारी नुकसान पहुंचा है, इसका मतलब यह है कि सीरियाई सेना ने अपनी रणनीति द्वारा आतंकवादियों का पूरा नेटवर्क ध्वस्त कर दिया है '।
उन्होंने जोर देकर कहा:
'' इन हालात में बहुत जल्द ही कई अन्य स्थानों पर ऑपरेशन के अवसर मिलेंगे, सीरिया सेना ने आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने पर कमर कस ली है और दूसरी ओर आतंकवादियों में मतभेद और फूट पड़ चुकी है, जिसका सीरिया संकट के सभी राजनीतिक पहलुओं पर असर पड़ेगा।''
हरबा के अनुसार इस ऑपरेशन से पहले भी सेना की कामयाबियों ने सीरिया में विरोधियों को कमजोर किया था लेकिन हालिया दिनों और हफ्तों की कई उपलब्धियों ने विरोधियों को इतना कमजोर कर दिया है कि वह इस बात के लिए तैयार हो गए हैं कि विवाद का राजनीतिक समाधान निकाला जाए। आतंकवादियों की लगातार नाकामियों ने अमेरिकी अधिकारियों को भी अपने पक्ष से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है और अब उनके लिए (अपनी बात थोपने की) कोई गुंजाइश नहीं बची है।
उन्होंने स्पष्ट किया:
''अलक़सीर में सेना के ऑपरेशन और उपलब्धियों ने साबित कर दिया है कि सीरिया सरकार के पास आतंकवाद से निपटने के लिए नित नई रणनीतियाँ हैं और देश राजनीतिक रूप से हुकूमत की इच्छा से आगे बढ़ रहा है।''
हरबा ने अंत में कहा:
''जिनेवा में होने वाली दूसरी कॉन्फ़्रेंस, सीरिया को आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई से नहीं रोक पाएगी. विद्रोह दिवालियापन का शिकार है और अब लड़ाई और आतंकवाद को छोड़ना चाहती है।''