24 अप्रैल 2013: क़तर के अधिकारियों के पास ''अरब शांति'' स्कीम की एक
संशोधित कॉपी है जिसके लागू होने की स्थिति में फ़िलिस्तीन का वुजूद ख़त्म
हो जाएगा।
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अरबी समाचार चैनल अल-आलम रिपोर्ट के अनुसार सन 2002 में आयोजित अरब शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी अरब के उत्तराधिकार अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया और उसे अरब देशों ने 'अरब शांति स्कीम 'के रूप में अपनी रणनीति बना दिया। हालांकि ज़ायोनी शासन ने ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और उसे अपनी उम्मीदों से असंगत बताते हुए इसकी कुछ शर्तें हटाने की मांग की।
गौरतलब है कि प्रस्ताव में संबंधित पक्षों की ज़िम्मेदारियों का कोई जिक्र नहीं किया गया और उसकी मंजूरी के बाद निम्नलिखित मुद्दों पर जोर दिया गया:
क: अधिकृत इलाक़ों से इस्राईली फ़ौज की पूरी वापसी, सीरिया की जवलान पहाड़ियों से इस्राइल 4 जून 1967 की लाइन पर वापसी और दक्षिण लेबनान की अधिकृत ज़मीनों से पीछे हटना।
ख: संयुक्त राष्ट्र महासभा अभिवेधन 194 के आधार पर बेघर फ़िलिस्तीनियों की समस्याओं का न्यायपूर्ण समाधान।
ग: गाजा पट्टी और पश्चिमी किनारे पर 4 जून 1967 और उसके बाद से कब्जा लिए गए फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों पर आधारित एक ऐसे स्थायी और प्रभावी फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना जिसकी राजधानी पूर्वी क़ुद्स हो।
उसके बाद अरब देशों के पास अरब और इस्राइल बीच झगड़ा जैसे खत्म हो गया था इसलिए एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें सभी की सुरक्षा का आश्वासन दिया गया और इसराइल के साथ संबंध नार्मल हालत पर लाए गए।
हालांकि ज़ायोनी शासन ने उक्त प्रस्ताव खारिज कर दिया और कतर अधिकारियों ने इसमें इस हद तक संशोधन करने की जिम्मेदारी उठाई कि ज़ायोनी उसे स्वीकार करलें। इसी सिलसिले में हाल ही में दोहा में अरब देशों के हालात पर एक बैठक आयोजित हुई। जिसका मक़सद क़तर के शासक द्वारा पहले से तय घोषणापत्र प्रतिनिधियों पर थोपना था और एक अरब प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन रवाना करना था ताकि अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर इस्राइल और अरबों के बीच विवाद की समाप्ति को इस तरह सुनिश्चित किया जाए कि तुर्की की सदस्यता इसमें आड़े न आए। गौरतलब है कि यह प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन रवाना होने वाला है।
फ़िलिस्तीन के मुद्दे को ख़त्म करने के लिए अरब शांति स्कीम में तब्दीली
इस सिलसिले में एक और अरब न्यूज चैनल अल-मिनार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कतर के अमीर के पास अरब शांति स्कीम का बदला हुआ नुस्खा मौजूद है।
गौरतलब है कि परिवर्तन का काम दोहा में एक टीम की निगरानी में अंजाम दिया गया और अब उसका वर्तमान स्वरूप इस तरह है:
अ: पहले खण्ड में परिवर्तन कर इस्राइल की गोलान हाइट्स और लेबनान से वापसी की शर्त ख़त्म कर दी गई है यानी अब विवाद केवल फिलिस्तीनियों और ज़ायोनी शासन के बीच रहेगा।
ख: बेघर फ़िलिस्तीनियों से संबंधित शर्त बदल कर कुछ इस तरह हो गई है:
बेघर फ़िलिस्तीनियों की समस्या का सर्वसम्मति से समाधान करना, इंसाफ़ का शब्द भी हटा दिया गया है और 'संयुक्त राष्ट्र महासभा अभिवेधन 194 के आधार पर पास किया गया इंसाफ शब्द भी हटा दिया गया है और अब यह प्रावधान इस तरह है '' बेघर फ़िलिस्तीनियों की समस्या का एक सर्वसम्मति समाधान पैदा करना।''
ग: स्थायी फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से संबंधित इस खंड में इस तरह बदलाव किया गया है:
'1967 के बाद के अधिकृत क्षेत्रों में जमीनों का ट्रांसफर करके हथियारों से मुक्त फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना। यानी क़तर ने स्थायी और प्रभावी 'शब्द हटा के' ट्रांसफ़र 'शब्द बढ़ा दिया है। इसी तरह' पूर्वी क़ुद्स जिसकी राजधानी हो 'को बदल कर' दोनों पक्षों की सहमति से पूर्वी क़ुद्स और धार्मिक स्थानों (के विवाद) का समाधान (निकाला जाए) 'कर दिया गया है।
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अरबी समाचार चैनल अल-आलम रिपोर्ट के अनुसार सन 2002 में आयोजित अरब शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी अरब के उत्तराधिकार अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया और उसे अरब देशों ने 'अरब शांति स्कीम 'के रूप में अपनी रणनीति बना दिया। हालांकि ज़ायोनी शासन ने ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और उसे अपनी उम्मीदों से असंगत बताते हुए इसकी कुछ शर्तें हटाने की मांग की।
गौरतलब है कि प्रस्ताव में संबंधित पक्षों की ज़िम्मेदारियों का कोई जिक्र नहीं किया गया और उसकी मंजूरी के बाद निम्नलिखित मुद्दों पर जोर दिया गया:
क: अधिकृत इलाक़ों से इस्राईली फ़ौज की पूरी वापसी, सीरिया की जवलान पहाड़ियों से इस्राइल 4 जून 1967 की लाइन पर वापसी और दक्षिण लेबनान की अधिकृत ज़मीनों से पीछे हटना।
ख: संयुक्त राष्ट्र महासभा अभिवेधन 194 के आधार पर बेघर फ़िलिस्तीनियों की समस्याओं का न्यायपूर्ण समाधान।
ग: गाजा पट्टी और पश्चिमी किनारे पर 4 जून 1967 और उसके बाद से कब्जा लिए गए फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों पर आधारित एक ऐसे स्थायी और प्रभावी फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना जिसकी राजधानी पूर्वी क़ुद्स हो।
उसके बाद अरब देशों के पास अरब और इस्राइल बीच झगड़ा जैसे खत्म हो गया था इसलिए एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें सभी की सुरक्षा का आश्वासन दिया गया और इसराइल के साथ संबंध नार्मल हालत पर लाए गए।
हालांकि ज़ायोनी शासन ने उक्त प्रस्ताव खारिज कर दिया और कतर अधिकारियों ने इसमें इस हद तक संशोधन करने की जिम्मेदारी उठाई कि ज़ायोनी उसे स्वीकार करलें। इसी सिलसिले में हाल ही में दोहा में अरब देशों के हालात पर एक बैठक आयोजित हुई। जिसका मक़सद क़तर के शासक द्वारा पहले से तय घोषणापत्र प्रतिनिधियों पर थोपना था और एक अरब प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन रवाना करना था ताकि अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर इस्राइल और अरबों के बीच विवाद की समाप्ति को इस तरह सुनिश्चित किया जाए कि तुर्की की सदस्यता इसमें आड़े न आए। गौरतलब है कि यह प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन रवाना होने वाला है।
फ़िलिस्तीन के मुद्दे को ख़त्म करने के लिए अरब शांति स्कीम में तब्दीली
इस सिलसिले में एक और अरब न्यूज चैनल अल-मिनार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कतर के अमीर के पास अरब शांति स्कीम का बदला हुआ नुस्खा मौजूद है।
गौरतलब है कि परिवर्तन का काम दोहा में एक टीम की निगरानी में अंजाम दिया गया और अब उसका वर्तमान स्वरूप इस तरह है:
अ: पहले खण्ड में परिवर्तन कर इस्राइल की गोलान हाइट्स और लेबनान से वापसी की शर्त ख़त्म कर दी गई है यानी अब विवाद केवल फिलिस्तीनियों और ज़ायोनी शासन के बीच रहेगा।
ख: बेघर फ़िलिस्तीनियों से संबंधित शर्त बदल कर कुछ इस तरह हो गई है:
बेघर फ़िलिस्तीनियों की समस्या का सर्वसम्मति से समाधान करना, इंसाफ़ का शब्द भी हटा दिया गया है और 'संयुक्त राष्ट्र महासभा अभिवेधन 194 के आधार पर पास किया गया इंसाफ शब्द भी हटा दिया गया है और अब यह प्रावधान इस तरह है '' बेघर फ़िलिस्तीनियों की समस्या का एक सर्वसम्मति समाधान पैदा करना।''
ग: स्थायी फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से संबंधित इस खंड में इस तरह बदलाव किया गया है:
'1967 के बाद के अधिकृत क्षेत्रों में जमीनों का ट्रांसफर करके हथियारों से मुक्त फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना। यानी क़तर ने स्थायी और प्रभावी 'शब्द हटा के' ट्रांसफ़र 'शब्द बढ़ा दिया है। इसी तरह' पूर्वी क़ुद्स जिसकी राजधानी हो 'को बदल कर' दोनों पक्षों की सहमति से पूर्वी क़ुद्स और धार्मिक स्थानों (के विवाद) का समाधान (निकाला जाए) 'कर दिया गया है।