22 अप्रैल 2013: वाशिंगटन में ह्युमन राइट्स आर्गनाइज़ेशन के एक कार्यकर्ता
''रंदी शोर्ट' ने प्रेस टीवी को दिए गए अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि
अमेरिका की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के मुसलमानों के साथ व्यवहार पर
सवालिया निशान हैं जिसके बारे में लोगों को गंभीर चिंता है।
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार वाशिंगटन में ह्युमन राइट्स आर्गनाइज़ेशन के एक कार्यकर्ता ''रंदी शोर्ट' ने प्रेस टीवी को दिए गए अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि अमेरिका की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के मुसलमानों के साथ व्यवहार पर सवालिया निशान हैं जिसके बारे में लोगों को गंभीर चिंता है।
उन्होंने कहा बोस्टन में होने वाले ताज़ा बम विस्फोट को भी मुसलमानों के साथ जोड़ा जा रहा है।
अमेरिकी जनता के ध्यान देने योग्य संख्या इस नतीजे तक पहुंच चुकी है कि इस तरह की घटनाएं इसी तरह बोस्टन विस्फोट में सरकारी रिपोर्ट पर पर विश्वास नहीं किया जा सकता, पता नहीं कि अमेरिकी इंटिलीजेंस एजेंसियां इस तरह के मामलों में क्या करते हैं, झूठ बोलते हैं और लोगों को झूठी खबर दी जाती है जिसके नतीजे में लोग सच्चाई तक नहीं पहुंच सकते।
इस तरह की खबरें फैलाने का मकसद मुसलमानों के अंदर भय और वहशत पैदा कर उन्हें यातनाएं पहुंचाना है। यह सभी काम अमेरिका की खुली इस्लामोफोबिया पालीसी के नतीजे में अंजाम दी जाती हैं।
अंत में उन्होंने कहा: अमेरिकी फेडरल पुलिस एफ. बी. आई इस्लामोफ़ोबिया करती है।
मुसलमानों को आतंकवादी कहना और इस्लामी देशों पर तरह तरह के आरोप लगाना भी इसी राजनीति का एक हिस्सा है
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार वाशिंगटन में ह्युमन राइट्स आर्गनाइज़ेशन के एक कार्यकर्ता ''रंदी शोर्ट' ने प्रेस टीवी को दिए गए अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि अमेरिका की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के मुसलमानों के साथ व्यवहार पर सवालिया निशान हैं जिसके बारे में लोगों को गंभीर चिंता है।
उन्होंने कहा बोस्टन में होने वाले ताज़ा बम विस्फोट को भी मुसलमानों के साथ जोड़ा जा रहा है।
अमेरिकी जनता के ध्यान देने योग्य संख्या इस नतीजे तक पहुंच चुकी है कि इस तरह की घटनाएं इसी तरह बोस्टन विस्फोट में सरकारी रिपोर्ट पर पर विश्वास नहीं किया जा सकता, पता नहीं कि अमेरिकी इंटिलीजेंस एजेंसियां इस तरह के मामलों में क्या करते हैं, झूठ बोलते हैं और लोगों को झूठी खबर दी जाती है जिसके नतीजे में लोग सच्चाई तक नहीं पहुंच सकते।
इस तरह की खबरें फैलाने का मकसद मुसलमानों के अंदर भय और वहशत पैदा कर उन्हें यातनाएं पहुंचाना है। यह सभी काम अमेरिका की खुली इस्लामोफोबिया पालीसी के नतीजे में अंजाम दी जाती हैं।
अंत में उन्होंने कहा: अमेरिकी फेडरल पुलिस एफ. बी. आई इस्लामोफ़ोबिया करती है।
मुसलमानों को आतंकवादी कहना और इस्लामी देशों पर तरह तरह के आरोप लगाना भी इसी राजनीति का एक हिस्सा है