जामिया अल-अज़हर के प्रोफ़ेसर अल्वी अमीन ने कहा: कोई बड़े से बड़ा आदमी भी मक्का व मदीना के इस्लामिक धरोहरों को ध्वस्त या उन्हें बर्बाद नहीं कर सकता है।तक़रीब समाचार एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि शेख अमीन ने अल-आलम चैनल को दिए जाने वाले अपने एक इंटरव्यू में मस्जिदुल हराम और मस्जिदुन नबी का बहाना बना कर इस्लामी निशानियों को मिटाने पर सऊदी अधिकारियों की आलोचना की और कहा: इस्लामी धरोहर हमारे दीन, इतिहास और कल्चर की निशानी हैं और यह मस्जिदुल हराम व मस्जिदुन नबी के विस्तार में रूकावट नहीं हैं तो उन्हें गिराने की जरूरत नहीं बल्कि उनकी ज़्यादा से ज़्यादा सुरक्षा की जरूरत है।उन्होंने इस बात की भी आलोचना की कि सऊदी अधिकारी इन इस्लामी धरोहरों को कुछ बेकार पत्थर कह रहे हैं जो बहुत ही अफ़सोस की बात है।उन्होंने कहा: इस्लाम के शुरूआती दिनों की मस्जिदों, पैगम्बर इस्लाम (स.अ) की माँ जनाबे आमेना (स.) की कब्र, जनाबे ख़दीजा (स.) का घर और पैगम्बरे अकरम (स.) के जन्म स्थान जैसी कीमती जगहों को ध्वस्त न करके भी विस्तार किया जा सकता है, उनका विध्वंस इस्लामी इतिहास को भूल जाने का कारण बनेगा।उन्होंने इन स्थानों को बचाने की मांग की है और कहा है कि यह सभी जगहें इस्लाम के शुरूआती दिनों की यादगार हैं, उन्हें नुकसान पहुंचाए बिना चारों ओर की दूसरी इमारतों को गिरा कर भी मस्जिदुल हराम और मस्जिदुन नबी को बढ़ाया जा सकता है।याद रहे कि हाल ही में सऊदी अरब के मुफ्ती शेख अब्दुल अजीज बिन अबदुल्लाह आले शेख ने फतवा दिया है कि मस्जिदुल हराम और मस्जिदुन नबी में विस्तार के रास्ते में मक्का और मदीना के जितने भी इस्लामी स्थान आते हैं उन्हें गिरा देना जाएज़ है और इतना ही नहीं बल्कि यह भी कहा है कि न केवल वैध है बल्कि ज़रूरी है।ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है बल्कि आले सऊद की हुकूमत के दौरान कई इस्लामी निशानियों को मिटा दिया गया है और आज उनका नाम व निशान भी बाक़ी नहीं है।
20 अप्रैल 2013 - 19:30
समाचार कोड: 411583
जामिया अल-अज़हर के प्रोफ़ेसर अल्वी अमीन ने कहा: कोई बड़े से बड़ा आदमी भी मक्का व मदीना के इस्लामिक धरोहरों को ध्वस्त या उन्हें बर्बाद नहीं कर सकता है......