आयतुल्लाह हाशमी रफ़सनजानी की न्यूज़ वेबसाईट की रिपोर्ट के अनुसार आपनें एक बयान में कहा है: मेरी और सुप्रीम लीडर की आपसी मुहब्बत और भाई चारा शुरू से लेकर अब तक उख़ूव्वत फ़िल्लाह (अल्लाह की ख़ातिर भाईचारा और मोमिन भाई से मुहब्बत) की जीती जागती तसवीर रही है। बहुतों नें इन्क़ेलाब से लेकर अब तक, आज की सियासी ज़बान में कहा जाए कि हमारी इस मुहब्बत में दरार पैदा करने की कोशिशें की हैं लेकिन अल्लाह के फ़ज़्ल और इमाम ख़ुमैनी रह. की दुआवों से हमेशा नाकाम रहे हैं और रहेंगे।हम एक मोर्चे में रहे, इस बात को कई साल गुज़र चुके हैं लेकिन तब से लेकर आज तक हमारी आपसी मुहब्बत न केवल यह कि एक सेकेंड के लिये भी कम नही हुई बल्कि इसमें हमेशा बढ़ोत्तरी ही होती रही है। वह मुल्क के अन्दर के शैतान सिफ़त लोग हों या बाहर के जितना भी चीख़ते रहें कि मेरे और सुप्रीम लीडर के बीच मतभेद है लेकिन इसमें ज़रा भी सच्चाई नहीं है। इस लिये कि मैंनें एक सेकेंड के लिये भी कभी उन्हें अकेला नहीं छोड़ा है और नाहि जब तक ज़िन्दा हूँ कभी ऐसा करूँगा। मैं आख़िरी साँस तक किसी भी मिशन और किसी भी पोस्ट पर रहूँ हमेशा इस्लामी हुकूमत और सुप्रीम लीडर का साथ देता रहूँगा। अल्लाह की ख़ातिर भाई चारा बनाए रखने में मुश्किलें कोई माने नहीं रखतीं। इमाम ख़ुमैनी रह. नें हमें वसीयत की थी कि साथ साथ रहें इसलिये हम जब तक ज़िन्दा रहेंगे अपना यह वादा निभाते रहेंगे। हमनें आज से कहीं ज़्यादा सख़्त दौर मिल कर गुज़ारा है और मैं ख़ुदा से भी यह दुआ करता आया हूँ कि कोई ऐसा दिन न आए जब मैं हूँ और आप न हों। इसलिये कि उनके न होने की सोच ही से मुझे सख़्त अकेले पन का एहसास होने लगता है।.........166
14 फ़रवरी 2013 - 20:30
समाचार कोड: 391003
बहुतों नें इन्क़ेलाब से लेकर अब तक, आज की सियासी ज़बान में कहा जाए कि हमारी इस मुहब्बत में दरार पैदा करने की कोशिशें की हैं लेकिन अल्लाह के फ़ज़्ल और इमाम ख़ुमैनी रह. की दुआवों से हमेशा नाकाम रहे हैं और रहेंगे....