15 दिसंबर 2012 - 20:30
समाचार कोड: 372874
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा व विदेश नीति समिति के अध्यक्ष ने आईएईए और ईरान के बीच हालिया वार्ता को संतोषजनक बताया...
इरना की रिपोर्ट के अनुसार इर्ना ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा व विदेश नीति समिति के अध्यक्ष ने आईएईए और ईरान के बीच हालिया वार्ता को संतोषजनक बताया।
अलाउद्दीन बुरुजर्दी ने रविवार को इर्ना से विशेष साक्षात्कार में कहा कि तेहरान में आईएईए और ईरान के बीच हालिया वार्ता संतोषजनक रही और दोनों पक्ष इस वार्ता के परिणाम से संतुष्ट हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान और आईएईए के बीच वार्ता के परिणाम के संतोषजनक होने के बावजूद अमरीका ने सुरक्षा परिषद की परिधि से बाहर जाकर ईरान के विरुद्ध नए प्रतिबंध लगा दिए। अलाउद्दीन बुरुजर्दी ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि ईरानी राष्ट्र ने अमरीकी प्रतिबंधों व धमकियों को सदैव अवसर में परिवर्तित किया है कहा कि पश्चिम का लक्ष्य ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों को रोकना है किन्तु ईरान आईएईए के नियमों के आधार पर और राष्ट्रीय हितों परिप्रेक्ष्य में निर्णय लेगा। ज्ञात रहे ईरान और गुट पांच धन एक के बीच तकनीकी टीम की 13 दिसंबर को तेहरान में दो दौर में बातचीत हुयी थी और दोनों पक्षों के बीच 16 जनवरी 2013 को अगले चरण की वार्ता पर सहमति हुयी है।
ज्ञात रहे अमरीका और उसके कुछ घटक ईरान पर शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की आड़ में परमाणु शस्त्रों की प्राप्ति के प्रयास का आरोप लगाते हैं और इसी आरोप के बहाने अमरीका ने ईरान पर एकपक्षीय प्रतिबंध लगा दिए हैं जबकि ईरान का कहना है कि उसकी समस्त परमाणु गतिविधियां शांतिपूर्ण हैं जो आईएईए के निरीक्षण में जारी हैं और वह परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी के सदस्य देश के नाते शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए परमाणु ऊर्जा के प्रयोग के अपने मूल अधिकार पर बल देता है।
आईएईए ने भी ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों का अनेक बार निरीक्षण किया है और उसे ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जिससे पश्चिमी देशों के आरोपों की पुष्टि हो।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने भी परमाणु शस्त्रों के निर्माण के वर्जित होने का फ़तवा दिया है।
ज़ायोनी परमाणु प्रतिष्ठान में काम करने वाले मर्दख़ाय वनूनो की सूचना के आधार पर जो उन्होंने 1980 के दशक में द संडे टाइम्ज़ को दी थी, अधिकाशं विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय ज़ायोनी शासन के पास 200-300 परमाणु वारहेड्स हैं।
कितनी अजीब बात है कि मध्यपूर्व में 200 से अधिक परमाणु वारहेड्स से संपन्न ज़ायोनी शासन से पश्चिमी देश यह तक नहीं पूछते कि वह अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को अपने परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण की अनुमति क्यों नहीं देता और परमाणु अप्रसार संधि एनपीटी से क्यों नहीं जुड़ता।
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