20 सितंबर 2012 - 20:30

पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम की शान में गुस्ताखी के खिलाफ दुनिया भर में विरोध का सिलसिला बदस्तूर जारी है.......

पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम की शान में गुस्ताखी के खिलाफ दुनिया भर में विरोध कासिलसिला बदस्तूर जारी है।प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार ईरान, इराक, हिंदुस्तान और दूसरे देशों की तरह पाकिस्तान में भी गुस्ताखाना फ़िल्म के विरोध की लहर ज़ोर पकड़ती जा रही है। पाकिस्तान के कई शहरों में आज शटर डाउٴन बंद किया गया, विरोध प्रदर्शन हुआ और रैलियों भी निकाली गईं। बहावलपुर में केंद्रीय संगठन व्यापारियों की दावत पर शहर में हड़ताल की गयी और विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक दलों की ओर से विरोध रैलियों निकाली गयीं। सियालकोट में पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन और यंग डॉक्टरों द्वारा आयोजित सरकारी अल्लामा इकबाल अस्पताल से विरोध रैली निकाली गई। ख़ैबर एजेंसी के जमरूद बाजार में स्कूल और कॉलेज के छात्रों ने रैलियां निकालीं। बलूचिस्तान के जिला नोशकी में अपमानजनक फिल्म के खिलाफ जमीयते उल्माए इस्लाम द्वारा विरोध रैली निकाली गई और फिल्म को इस्लाम व मसलमानों के ख़िलाफ़ एक गहरी साजिश बताया गया।उधर भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक बार फिर मुसलमानों ने इस्लाम विरोधी गुस्ताखाना फिल्म के खिलाफ अमेरिकी कोन्सलेट के सामने विरोध प्रदर्शन किया। जबकि इराक के पवित्र शहर कर्बला की जनता ने गुस्ताखाना अमेरिकी - इस्राइली फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए इराक से अमेरिकी राजदूत को निकालने की मांग की।बग़दाद से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार हजारों की संख्या में इराकी जनता ने रसूले इस्लाम की शान में गुस्ताखी के खिलाफ कर्बला की सड़कों पर निकलकर "लब्बैक या रसूलल्लाह ..." के नारे लगाए। इस अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी दूतावास बंद करने और उसके राजनयिकों को देश निकालने की मांग की। उधर मिस्र ने गुस्ताखाना फिल्म की तैयारी में मदद करने के लिए अमेरिकी पादरी टेरी जोन्स सहित आठ लोगों के वारंट गिरफ्तारी जारी कर दिए हैं, मिस्री अभियोजक जनरल ने फिल्म की तैयारी में मदद करने वाले 7 मिस्री काप्टियों सहित अमेरिकी पादरी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र संघ ने गुस्ताखाना फिल्म को विचार अभिव्यक्त के नियम का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस शर्मनाक काम का किसी तरह से भी बचाव नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने न्यूयॉर्क में प्रेस कांफ़्रेंस में कहा कि गुस्ताखाना फिल्म शर्मनाक कदम है उन्होंने कहा कि विचार अभिव्यक्त का सबको अधिकार है, परंतु इस तरह के विचार अभिव्यक्त शर्मनाक हैं।........166