ईद वास्तव में ईश्वर पर आस्था रखने वालों के जीवन में निर्णायक परिवर्तनों की सूचक है। क्योंकि ईद धर्म की महानता तथा मन की इच्छाओं के विरुद्ध संघर्ष में विजय का दिन है। इस शुभ दिन में ईश्वर पर आस्था रखने वाले ईश्वर का गुणगान करते हैं हम भी इस शुभ अवसर पर आप सब की सेवा में बधाई प्रस्तुत करते हैं। इस्लाम में उपासना कुछ इस प्रकार से है कि उसमें व्यक्तिगत आयामों के साथ ही साथ सामाजिक आयामों पर भी ध्यान दिया गया है। इसी लिए ईद में व्यक्तिगत उपासना तथा आध्यात्म के पहलुओं के साथ ही साथ राजनीतिक व सामाजिक आयाम भी नज़र आते हैं। ईद के दिन लोगों का ईदगाह या मस्जिदों में एकत्रित होना मुसलमानों के मध्य एकता व समरसता में प्रभावी हो सकता है। वे ईद के दिन एक साथ एकत्रित होकर एक दूसरे की समस्याओं और इसी प्रकार विचारों से अवगत हो सकते हैं। इस सामारोह में द्वेष व शत्रुता, मित्रता व सदभावना में बदल जाती है और धर्म पर आस्था रखने वाले एक पंक्ति में खड़े होकर एक दूसरे से एकता व निकटता का अधिक आभास करते हैं। ईद, एक ओर मनुष्य और ईश्वर के मध्य आध्यात्मिक संबंध की भी सूचक है तो दूसरी ओर मनुष्य के अपने भाइयों के साथ संबंधों को भी दर्शाती है। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैही व आलेही व सल्लम के पौत्र इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम ईद के दिन को सामारोह, उत्सव तथा एक दूसरे की सहायता का दिन मानते हैं और अपनी एक प्रार्थना में जो उनकी प्रार्थनाओं के संकलन सहीफए सज्जादिया की ४५वीं प्रार्थना है, इस प्रकार कहते हैः हे ईश्वर! हम तेरी ओर लौटते हंप अपनी उस ईद के दिन जिसे तूने ईमान व आस्था रखने वालों के लिए ईद व उत्सव और अपने धर्म के अनुयाइयों के लिए एकत्रित होने और एक दूसरे की सहायता करने का दिन बनाया है।

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