वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा जताई है। इस बार उन्होंने पुलित्जर पुरस्कार पर भी अपना दावा पेश किया है। ट्रंप का कहना है कि अपनी लेखनी के कारण वह इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के हकदार हैं।
अल-मयादीन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप पहले भी नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर उनकी आलोचना शुरू हो गई है और सोशल मीडिया पर उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।
ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें अपनी लिखी सामग्री के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिलना चाहिए था। हालांकि, उन्हें अब तक न तो नोबेल शांति पुरस्कार मिला है और न ही पुलित्जर पुरस्कार। उन्होंने इस पुरस्कार के विजेताओं की योग्यता पर भी सवाल उठाए। खासकर रूस से जुड़े घटनाक्रम की रिपोर्टिंग के लिए सम्मान पाने वाले पत्रकारों को लेकर उन्होंने संदेह जताया।
अभी यह साफ नहीं है कि ट्रंप अपनी किन रचनाओं के लिए पुलित्जर पुरस्कार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कई किताबें प्रकाशित की हैं, लेकिन उनमें से कई पेशेवर लेखकों की मदद से लिखी गई थीं।
ट्रंप की सबसे चर्चित किताबों में 1987 में प्रकाशित द आर्ट ऑफ द डील शामिल है। हालांकि, इस किताब को लिखने में ट्रंप की वास्तविक भूमिका लंबे समय से विवाद का विषय रही है।
किताब के सह-लेखक टोनी श्वार्ट्ज ने दावा किया था कि उन्होंने ट्रंप की बहुत कम भागीदारी के साथ इसका अधिकांश हिस्सा लिखा था। श्वार्ट्ज के अनुसार, उनसे ट्रंप के खिलाफ की गई आलोचनाओं को हटाने के लिए भी कहा गया था।
श्वार्ट्ज ने कई बार इस किताब को लिखने में अपनी भूमिका पर पछतावा जताया और ट्रंप की कड़ी आलोचना की। ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर पुरस्कारों को लेकर उनकी महत्वाकांक्षा और उनकी लेखकीय भूमिका पर बहस छेड़ दी है।
आपकी टिप्पणी