18 अक्टूबर 2026 - 18:28
इस्राईल में बढ़ी खींचतान, नेतन्याहू खेमे में मंत्री पद और संसदीय सीटों को लेकर टकराव

गठबंधन में तनाव का एक बड़ा कारण अगली सरकार में मंत्री पदों का बंटवारा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बेन ग्विर ने रक्षा मंत्रालय की मांग की है।

तल अवीव: इस्राईल में चुनाव से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक खेमे में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। हिब्रू मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, दक्षिणपंथी गठबंधन में शामिल दलों के बीच संसद की सीटों और मंत्री पदों को लेकर खींचतान तेज हो गई है। सर्वेक्षणों में नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी की स्थिति मजबूत नहीं दिखने के बीच गठबंधन के भीतर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।

हिब्रू अखबार मआरिव के अनुसार, दक्षिणपंथी खेमे में इस बात को लेकर चिंता है कि वोटों के बंटवारे से कुछ दल चुनाव में जरूरी न्यूनतम सीमा पार नहीं कर पाएंगे। इससे अगली सरकार बनाने के लिए गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लिकुड पार्टी अपनी संसदीय सीटें बढ़ाना चाहती है। इसके साथ ही वह इतामार बेन ग्विर की पार्टी ‘ओत्जमा येहुदित’ (यहूदी शक्ति) का प्रभाव सीमित करने और दक्षिणपंथी मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है।

मआरिव के एक सर्वेक्षण में लिकुड को 18 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया। वहीं, नेतन्याहू के खेमे को कुल 51 सीटें मिलने की बात कही गई है। इन आंकड़ों के आधार पर गठबंधन के भीतर चुनावी रणनीति को लेकर दबाव बढ़ गया है।

गठबंधन में तनाव का एक बड़ा कारण अगली सरकार में मंत्री पदों का बंटवारा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बेन ग्विर ने रक्षा मंत्रालय की मांग की है।

इसके जवाब में नेतन्याहू ने कहा कि रक्षा मंत्रालय और आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय लिकुड पार्टी के पास ही रहने चाहिए। इससे दोनों नेताओं के बीच मतभेद और गहरे हो गए हैं।

बेन ग्विर ने नेतन्याहू और बेजालेल स्मोट्रिच पर अपनी पार्टी को कमजोर करने के लिए अभियान चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी को पर्याप्त सीटें मिलती हैं, तो वह रक्षा मंत्रालय की मांग करेंगे।

मआरिव के अनुसार, स्मोट्रिच ने लिकुड के साथ सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों दलों ने दक्षिणपंथी मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से संयुक्त चुनावी कार्यालय बनाया है। इसके तहत करीब दो लाख मतदाताओं को सक्रिय करने की योजना है।

लिकुड ने बेन ग्विर की पार्टी को भी इस अभियान में शामिल करने की कोशिश की, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, बेन ग्विर ने इसमें भाग लेने और इसके लिए धन देने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। स्मोट्रिच ने उन पर पूरे दक्षिणपंथी खेमे की ताकत बढ़ाने के बजाय दूसरी पार्टियों की सीटें हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

लिकुड और स्मोट्रिच की पार्टी के बीच अतिरिक्त वोटों के बंटवारे को लेकर समझौता भी हुआ है, जबकि बेन ग्विर की पार्टी इससे बाहर रही।

इस बीच, अति-रूढ़िवादी यहूदी दल भी चुनावी चुनौतियों और आंतरिक मतभेदों से जूझ रहे हैं। वे अगली गठबंधन सरकार में अपनी शर्तें रखने की तैयारी कर रहे हैं।

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