17 अक्टूबर 2026 - 19:16
ग़ज़्ज़ा में संघर्षविराम के बाद भी इस्राईल ने की 340 से ज्यादा बच्चों की हत्या

ग़ज़्ज़ा में करीब 8 लाख बच्चे बेघर, 60 हजार बच्चों ने खोया माता-पिता में से किसी एक या दोनों को

ग़ज़्ज़ा: संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के प्रवक्ता रिकार्डो पियर्स ने दावा किया है कि 11 अक्टूबर 2025 को संघर्षविराम लागू होने के बाद से ग़ज़्ज़ा पट्टी में इस्राईल की सैन्य कार्रवाइयों में 340 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य बच्चे घायल हुए हैं।

कुद्स समाचार एजेंसी के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, रिकार्डो पियर्स ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की साप्ताहिक प्रेस वार्ता में ग़ज़्ज़ा के बच्चों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि संघर्षविराम के बावजूद बच्चों की मौत और घायल होने का सिलसिला जारी है।

यूनिसेफ के प्रवक्ता के अनुसार, पिछले दो हफ्तों के दौरान इस्राईल के हमलों में 5 लड़कों और 2 लड़कियों की मौत हुई है। इसके अलावा, पहले लगी चोटों के कारण 2 अन्य बच्चों ने भी दम तोड़ दिया। इस अवधि में कम से कम 33 बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

रिकार्डो पियर्स ने बताया कि ग़ज़्ज़ा में करीब 8 लाख बच्चे अब भी विस्थापित हैं। इनमें से ज्यादातर बच्चे तंबुओं या उन इमारतों में रह रहे हैं, जिन्हें हमलों के दौरान नुकसान पहुंचा था। इन जगहों पर उनके लिए पर्याप्त सुरक्षा और बेहतर रहने की सुविधाएं नहीं हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि अनुमान के मुताबिक, ग़ज़्ज़ा में करीब 60 हजार बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक या दोनों को खो दिया है।

यूनिसेफ के प्रवक्ता ने कहा कि ग़ज़्ज़ा के बच्चे लगातार चौथी सर्दी बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजार रहे हैं। संघर्षविराम के बाद खाद्य सुरक्षा की स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन युद्ध के प्रभाव अब भी बच्चों के जीवन के हर हिस्से पर पड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ग़ज़्ज़ा में बुनियादी सेवाएं अब भी बड़े पैमाने पर बाधित हैं। वहां मानवीय सहायता की जरूरत बहुत ज्यादा है, जबकि उपलब्ध आर्थिक संसाधन जरूरत के मुकाबले काफी कम हैं।

रिकार्डो पियर्स के मुताबिक, संघर्षविराम लागू होने के बाद से ग़ज़्ज़ा में 5.60 लाख से ज्यादा बच्चे अलग-अलग शैक्षणिक केंद्रों में दोबारा पढ़ाई शुरू कर चुके हैं। इनमें यूनिसेफ के सहयोग से चलने वाले 200 से ज्यादा शैक्षणिक केंद्र भी शामिल हैं।

हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि बच्चों की शिक्षा दोबारा शुरू होने के बावजूद ग़ज़्ज़ा में बुनियादी सुविधाओं और मानवीय सहायता की भारी कमी बनी हुई है।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि संघर्षविराम के एक साल से ज्यादा समय बाद भी ग़ज़्ज़ा के अलग-अलग इलाकों में इस्राईल की सैन्य कार्रवाइयां और संघर्षविराम के उल्लंघन जारी हैं। इसमें कहा गया है कि रिहायशी इलाकों और फलस्तीनियों की जमीनों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

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