19 अप्रैल 2026 - 15:30
ईरान पर युद्ध थोपने वालों को जुर्माना देना होगा

ईरान इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे कानूनी रूप से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालतों और संस्थाओं में मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे, ताकि दोषियों को जवाबदेह बनाया जा सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।

ईरान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और इस्राईल ने केवल एक साधारण सैन्य टकराव शुरू नहीं किया, बल्कि उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से ईरानी राष्ट्र के खिलाफ आक्रामक युद्ध छेड़ा। उनके अनुसार, इस दौरान ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन हुआ, नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया और आम लोगों के मौलिक अधिकारों को भी प्रभावित किया गया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल भौतिक क्षति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की प्रतिष्ठा, सुरक्षा और मानसिक शांति को भी ठेस पहुंची है। उन्होंने आगे कहा कि इस संघर्ष के दौरान कई ऐसे कदम उठाए गए जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं। इनमें नागरिक इलाकों को निशाना बनाना, बुनियादी ढांचे को तबाह करना और मानवीय सिद्धांतों की अनदेखी करना शामिल है। उनके मुताबिक, इन कार्रवाइयों की स्वतंत्र और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई दुनिया के सामने आ सके।

न्यायपालिका प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ईरान इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे कानूनी रूप से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालतों और संस्थाओं में मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे, ताकि दोषियों को जवाबदेह बनाया जा सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।

उन्होंने कहा कि ईरान की नीति स्पष्ट है जो भी देश या ताकत इस आक्रामकता में शामिल रही है, उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।हम इन आक्रमणकारियों को यूं ही नहीं छोड़ेंगे उन्होंने कहा, “बल्कि हर कानूनी और कूटनीतिक माध्यम से उनका पीछा करेंगे, ताकि उन्हें सज़ा मिले और भविष्य में ऐसे कृत्यों की पुनरावृत्ति न हो।

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